
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)04 अगस्त। शनिवार को किसान उत्पादक संघ एवं दुग्ध उत्पादक संघ के पदाधिकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र एवं सहकार भारती के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।
कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान , सहकार भारती के प्रांतीय उपाध्यक्ष रामदयाल सिंह सहकारिता के मूर्धन्य नेतृत्वकर्ता डॉक्टर शंभू कुमार सिंह और डॉक्टर दिनेश प्रसाद सिंहा ने संयुक्त रूप से किया।
विषय प्रवेश के संदर्भ मे कार्यक्रम की शुरुआत सहकार गीत से हुई जिसे सामुहिक रूप से गाया गया।संबोधन में कहा की संस्कार और सहकार का आपस में बड़ा तालमेल है और इसी से समाज में विकास की नई गंगा का सृजन होगा। आवश्यकता है आपको चिंतन करके समाज को जोड़ने की। आज किसानों के मध्य एक बिखराव देखने के लिए मिल रहा है जिसके कारण समाज के सभी वर्ग आगे बढ़ रहे हैं परंतु किसान यथावत दशको पूर्व की स्थिति में आज भी खड़ा है ।अब हमें अपनी सोच में बदलाव लाना होगा और इसी उद्देश्य से इस प्रशिक्षण का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर में किया गया है।
डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा ने बताया की जब तक किसान संगठित नहीं होंगे इस देश का विकास संभव नहीं है क्योंकि देश में लगभग 70% आबादी कृषि या कृषि आधारित अन्य कार्यक्रमों से ही आपकी अपनी जीविका प्राप्त कर रही है और आज भी इसी क्षेत्र में लोगों को अधिकतम रोजगार प्राप्त हो रहा है। इनकी मजबूती से ही देश के मजबूती और इस विशाल जनसंख्या की इच्छाओं की पूर्ति संभव है।
कृषि वैज्ञानिक एवं हेड डा पी के द्विवेदी ने किसान के विकास में फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी के अवधारणा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आज हमारे पास पूर्व की तुलना में छोटी जोत होने के कारण उत्पादन ज्यादा होने पर भी कल बाजार योग्य उपलब्ध उत्पादन कम मात्रा में उपलब्ध है ।जिसका विवरण करना अकेले एक चुनौती पूर्ण कार्य है ।इस चुनौतियों से किसानों को बचाने के लिए एवं उन्हें मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने एक बहुत ही बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजना प्रारंभ की है। जिसका नाम फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी एवं ऑर्गेनाइजेशन है ।इसके माध्यम से एक जैसे उत्पाद वाले किसानों का एक बड़ा संगठन खड़ा होता है ।जिसमें अधिकतम 750 तक सदस्य हो सकते हैं और जिनके द्वारा सामान पूंजी एक जगह इकट्ठा करके एक बड़ी धनराशि कार्यक्रमों को चलाने के लिए एकत्र की जाती है और इस कंपनी एक्ट में निबंध कर कर कंपनी का निर्माण किया जाता है ।जिसके द्वारा किसानों के लिए आवश्यक सभी प्रकार के उपादान थोक मूल्य पर बाजार से उठाव किया जाता है जो अपेक्षाकृत कम मूल्य पर प्राप्त होता है ।इसी प्रकार उत्पादन के पश्चात अपने सामानों को एक साथ एक ब्रांड नाम के साथ बाजार में विपणन करने पर जहां उसका मूल्य ज्यादा मिलता है वहीं पर इसे एक बड़ा ग्राहकों का जनाधार तैयार होता है जिन्हें आप नियमित अपने सेवाएं देकर निरंतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं इसमें केवल इलाज फल सब्जी दूध कहे विपणन नहीं होता है बल्कि कई प्रकार के प्रसंस्करण के कार्य भी किए जाते हैं और प्रसंस्कृत सामग्रियों का मूल्य सामान्य उत्पादों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है।
शुरुआत के दो-तीन सालों तक कंपनी द्वारा जो कार्य किया जाता है उनके मूल्यांकन के पश्चात भारत सरकार के द्वारा कई प्रकार की सुविधा उन्हें देर होती है जिसमें की कंपनी के विस्तारीकरण के लिए भी बहुत ही कम ब्याज पर करोड़ों की परियोजनाएं भी यह कंपनी स्थापित करने में भविष्य में सफल हो सकती है देश में इस समय में बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां इस प्रकार की किसानों के द्वारा बनाई गई है जिनका सालाना टर्नओवर हजारों करोड़ों रुपए हैं और आज उससे जुड़े सभी किसान बहुत ही खुशहाल हो चुके हैं भोजपुर में भी इसकी व्यापक संभावनाएं हैं आवश्यकता है हमें संगठित होकर इन कार्यक्रमों को अपने लिए अपने आगे भी जिला स्तर पर किसानों के मध्य जागरूकता के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे
इस अवसर पर डॉक्टर रामनरेश कृषि वैज्ञानिक भोजपुर ने बताया कि जिले में संगठन के विकास के लिए के लिए आवश्यक सभी प्रकार का सहयोग कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा दिया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक शशि भूषण कुमार शशि ने बताया जिले में जैविक खेती के अलावे सब्जियों के कई फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनियों का गठन हुआ है इस संगठन से जुड़े किसान भाइयों को कृषि विज्ञान केंद्र ने अपने कई कार्यक्रमों से जोड़ा है विशेष तौर पर बीज उत्पादन के कार्यक्रम से तथा सामुदायिक प्रशिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम जिसके अंतर्गत तकनीकी ज्ञान के साथ अन्य प्रकार के लाभ भी समूह से जुड़े किसानों को सहजता से प्राप्त हो जाते हैं।

