
RKTVNEWS/आरा (भोजपुर)22 जुलाई।परंपरा और संस्कृति के मार्ग को आरा की वर्तमान पीढ़ी शास्त्रीय संगीत से प्रकाशित कर रही है। गुरुकुल परंपरा में शिष्यों के वटवृक्ष पर फालदायक हो चले हैँ ।
आरा का सांगीतिक भविष्य सुखद होगा और इसकी बागडोर कुशल हाथो मे हैँ। उक्त बाते वरिष्ठ ताल गुरु राणा प्रताप सिन्हा ने कहा।
अवसर था शिवादी क्लासिक सेंटर ऑफ़ आर्ट एन्ड म्यूजिक के द्वारा आयोजित गुरुपर्व संस्कृति महोत्सव का। इस अवसर नृत्य सम्राट पंडित बिरजू महाराज की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक कर विधिवत पूजन किया गया व इंद्राधानुषी संगीत परम्परा के संस्थापक व गुरु संगीतज्ञ दुधेश्वर लाल के तैलचित्र पर माल्यार्पण किया गया।
कत्थक कलाकारों में अमित कुमार, राजा कुमार, संजना, स्नेहा पांडेय, कुमारी रूपा, ख़ुशी कुमारी गुप्ता समेत कई युवा व बाल कलाकारो ने गुरु बक्शी विकास का अभिनन्दन किया वही गायन के क्षेत्र में श्रेया पाण्डेय, अजीत पाण्डेय, नितीश पाण्डेय, अभिजीत मिश्रा, पिंटू यादव, वंदना समेत सभी इस परंपरा की अन्य शिष्याओं ने विदुषी बिमला देवी को सम्मानित किया।
गुरुजनो ने शिष्यों का गंडाबंधन किया जो आज की युवा पीढ़ी के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।इस अवसर पर श्रेया पाण्डेय ने राग बागेश्री में बड़ा ख्याल, तीनताल की बंदिश व तराना प्रस्तुत कर समाँ बांधा। वही अजीत पांडेय ने खमाज की ठुमरी “कैसो बजावत श्याम मुरलिया” प्रस्तुत कर वहावाही लूटी। बीएन राय व महेश यादव ने अपने स्वरों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वही कत्थक नर्तक अमित कुमार व राजा कुमार ने मनोहारी कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया।
एकल कत्थक में छपरा की कुमारी रूपा व कुमारी अनिषा तथा स्थानीय स्नेहा पाण्डेय, सलोनी व मुस्कान ने पारम्परिक कत्थक प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। गौरी, सोमी, सोनी, अंजलि, अमृता, हंशिका व वंदिता ने कत्थक के अंग भाव व अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राणा प्रताप सिन्हा व सूरज कांत पांडे के तबले की थाप ने रंग बिखेरा। मंच संचालन शालिनी तथा संजना कुमारी व धन्यवाद ज्ञापन रोहित कुमार ने किया।इस अवसर पर डॉ. जया जैन, डॉ. किरण कुमारी, समाज सेवक अमरदीप, जयकिशोर सिँह समेत कई संगीत प्रेमी उपस्थित थे।
