आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)13 जून। बुधवार 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर ‘नई आशा‘ के कार्यालय सभागार में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका विषय था-“बाल श्रम निषेध क्यों?”
मुख्य वक्ता जयंत कुमार, श्रम अधीक्षक भोजपुर ने कहा कि 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों से किसी प्रकार का श्रम करना दंडनीय अपराध है। अगर किसी क्षेत्र में बाल श्रमिक की सेवा लेते पाया गया तो नियोक्ता के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। अगर आप लोग भी ऐसा देखे तो विभाग को तत्काल सूचना दें। बिना सामाजिक जागरूकता के बाल श्रम को रोकना कठिन है।विभाग द्वारा बाल श्रमिक को तत्काल मुक्त कराकर उसके पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही नियोक्ता के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी। श्री जयंत कुमार ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में अनेक लाभकारी योजनाएं संचालित कराई जा रही हैं। उन्होंने बाल श्रमिक के विरुद्ध विभाग द्वारा किए गए कार्य एवं नियमों की विस्तृत चर्चा की। प्रधानाघ्यापिका कंचन कामिनी ने कहा कि जब से नया श्रम कानून आया है,भारत में बाल श्रमिको की संख्या में काफी कमी आई है। इनके पुनर्वास हेतु भी सरकार द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। घरों में कार्य करने वाले बाल श्रमिकों के प्रति समाज को सचेत रहने की जरूरत बताई। श्रम पवर्तन पदाधिकारी अखिलेश कुमार सिंह ने बाल श्रम निषेध कानून के संदर्भ में विस्तृत जानकारी देते हुए इस अभियान की सफलता में सहयोग की अपील की। अध्यक्षता डॉ भीम सिंह भवेश, संचालन दर्शना कुमारी एवं धन्यवाद ज्ञापन सत्यम केसरी ने किया। मौके पर इंटर्नशिप कर रहे एलपीयू की मोनी कुमारी, प्रकाश कुमार सिंह, माधव जी, अर्पित कुमार, धीरज कुमार, अदित्यराज, विकास कुमार, प्रियांशू कुमार, रोहित कुमार दुबे सहित राकेश सिंह, मनीष वत्स, बिट्टू कुमार, कुंदन कुमार एवं सुमित पांडेय आदि थे।
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