आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)22 मई।21मई को भारत के प्रसिद्ध मनिसी त्रिदण्डी स्वामी के शिष्य द्वारा घुसिया में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर ज. गु. रा. विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेन्द्र ने श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिवस में वंदना प्रकरण, विविध स्तुतियो एवं 24 अवतारों की सुत्रवत व्याख्या की।
आचार्य डॉ धर्मेन्द्र ने कहा भगवान के अवतार का मुख्य हेतु भगवान की भक्त पर कृपा ही है। 24अवतारों की कथा कहते हुए कहा कि भगवान के अवतार के अनेक कारण बताए जाते है जैसे अनाचार, अत्याचार,पापाचार, धर्म की हानि आदि।पर मुख्य हेतु भक्तों पर भगवान कृपा की वृष्टि करना ही है। आचार्य जीने कहा राक्षसों ,अन्यायियों,अत्याचारियों को तो अपने संकल्प से ही मार सकते ,मगर सेवरी का बैर खाना,विदुरानी का साग खाना, भक्तों के घर जा जाकर दर्शन आदि के लिए निराकार ब्रह्म नराकार रुप में अवतरित होते है।…रामावतार की चर्चा करते हुऐ आचार्य जी ने कहा रसिकभक्त कहते हैंकि किसी अवतार में भगवान के माथे सेहरा नहीं बंधा ,न मउर चढ़ा, अतःविवाह ही मुख्य हेतु रहा.।…कृष्णा अवतार की चर्चा करते हुए आचार्य जी ने कहा श्रीकृष्णा के अवतार का हेतु भी अनेक है पर मुख्य हेतु त्रेतायुग में मिथलानियों और ऋषियों को दिया गया वचन,ऋषिकृषि हेतु गौपालन, पर्यावरण की सुरक्षा,विविध प्रदूषणों से निजात पाने का संदेश देना भी है। दातात्रेय चरित्र को कहते हुए अनुसूया माता के पातिव्रत्य धर्म पर भी कारूणिक व्याख्यान देते हुए विदुर जी के धराधाम पर आने और विभांडक ऋषि का भी चरित्र चित्रण करते हुए क्रियामाण, संचित व प्रारब्ध कर्म की व्यावहारिक अर्थ किया।..कथा सुनते हुए भक्त विह्वल हो जाते ,कथामृत का पान करते अघाते नहीं।।
कथा प्रारंभ होने के पहले कल तक जो भिषण गर्मी थी , लू चल रही थी, कथा प्रारंभ होने के पश्चात हल्की बारिश हुई,मौसम खुशनुमा हुआ,दूर दराज गांव से श्रद्धालु बहती भक्ती की गंगा में गोता लगाने हेतु उमड़ परे यज्ञ समिति के ओर से भक्तों के लिए जलपान और भंडारे की उत्तम व्यवस्था की गई हैं।
