RKTV NEWS/आरा(भोजपुर )11 मई। भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने भोजपुरी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे भोजपुरी को सरकारी कामकाज की भाषा बनाने का दर्जा मिल सकता है।
चुनाव प्रचार अभियान में कल आरा पहुंचे का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि भोजपुरी एक लोकप्रिय भाषा है जो बिहार और उत्तरप्रदेश के बड़े हिस्से में लोगों द्वारा बोली जाती है। इसको अवश्य ही सरकारी कामकाज की भाषा के बतौर मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शाहाबाद जिसमें भोजपुर, रोहतास, कैमूर और बक्सर जिले शामिल है, यहां के लोगों की यह एक चिरलंबित मांग है।
इस मुद्दे पर भाजपा सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और न ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह ने बिहार मेंअपने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान इस मुद्दे पर कुछ बोला है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी रहस्यमय चुप्पी साध रखी है। यह भोजपुरी भाषी मतदाताओं के साथ बहुत बड़ा अन्याय है।
भोजपुरी के नाम पर वोट ठगवों को सबक सिखांए:अजीत कुशवाहा
आरा संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रहे डुमराव से भाकपा(माले) विधायक अजित कुशवाहा ने कहा कि मैंने विधानसभा में इस सवाल को उठाया लेकिन नीतीश सरकार गूंगी-बहरी बनी रही जबकि यह भोजपुरी भाषी लोगों की संवेदना से जुड़ा सवाल है।
विडम्बना है कि भोजपुरी के कई गायक व अभिनेता भाजपा से जुड़े हुए हैं। मनोज तिवारी, रवि किशन और दिनेशलाल यादव निरहुआ क्रमशः उत्तर-पूर्वी दिल्ली, गोरखपुर औरआजमगढ़ से भाजपा सांसद हैं और इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं। ये सभी भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का वादा कर भोजपुरी भाषी लोगों का वोट ठगते रहे है। लेकिन, चुनाव जीतते ही वे इसे भूल जाते हैं। भोजपुरी भाषी मतदाता उनको भी मातृभाषा के साथ की गईं गद्दारी का इस बार मजा चखायेगी।
