RK TV News
खबरें
Breaking Newsज्योतिषधार्मिकराष्ट्रीय

ऐसे प्रकट हुये भगवान शिव “शिव लिंग के” रूप में

    महाशिवरात्री पर विशेष।  शिव-शक्ति मिलन व्रत-उपवास का महात्म्य

आरा/भोजपुर (ज्योतिषाचार्य संतोष पाठक) साल में कुल 12 शिवरात्रि आती हैं, लेकिन फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। शिवरात्रि का अर्थ ‘वह रात्रि जिसका शिवतत्त्व से घनिष्ठ संबंध है।’ भगवान शिव की अतिप्रिय रात्रि को शिवरात्रि कहा जाता है। शिव पुराण के ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए।

शिवपुराण में उल्लेखित एक कथा के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। भोलेनाथ ने वैराग्य जीवन त्याग कर गृहस्थ जीवन अपनाया था। इस दिन विधिवत‍् आदिदेव महादेव की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं व कष्टों का निवारण होता है।

शिवरात्रि को लेकर बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं। विवरण मिलता है कि भगवती पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए घनघोर तपस्या की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसके फलस्वरूप फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यही कारण है कि महाशिवरात्रि को अत्यन्त महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है।

एक बार मां पार्वती ने शिव से पूछा कि कौन-सा व्रत उनको सर्वोत्तम भक्ति व पुण्य प्रदान कर सकता है? तब शिव ने स्वयं इस शुभ दिन के विषय में बताया था कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी की रात्रि को जो उपवास करता है, वह मुझे प्रसन्न कर लेता है। मैं अभिषेक, वस्त्र, धूप, अर्घ्य तथा पुष्प आदि समर्पण से उतना प्रसन्न नहीं होता, जितना कि व्रत-उपवास से। इसी दिन, भगवान विष्णु व ब्रह्मा के समक्ष सबसे पहले शिव का अत्यंत प्रकाशवान आकार प्रकट हुआ था। ईशान संहिता के अनुसार ब्रह्मा व विष्णु को अपने अच्छे कर्मों का अभिमान हो गया। इससे दोनों में संघर्ष छिड़ गया। विष्णु और ब्रह्मा ने इस प्रकाश स्तम्भ के ओर-छोर को जानने का निश्चय किया। श्रीविष्णु नीचे पाताल की ओर इसे जानने गए और श्रीब्रह्मा अपने हंस वाहन पर बैठ ऊपर गए वर्षों यात्रा के बाद भी वे इसका आरंभ या अंत न जान सके। वे वापस आए, अब तक उनका क्रोध भी ग़लत हो चुका था तथा उन्हें भौतिक आकार की सीमाओं का ज्ञान मिल गया था।

जब उन्होंने अपने अहम‍् को समर्पित कर दिया, तब श्रीशिव प्रकट हुए तथा सभी विषय-वस्तुओं को पुनर्स्थापित किया। शिव का यह प्राकट्य फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि को ही हुआ था। इसलिए इस रात्रि को महाशिवरात्रि कहते हैं। इसी दिन भगवान शिव और आदि शक्ति का विवाह हुआ था। भगवान शिव का ताण्डव और भगवती का लास्यनृत्य दोनों के समन्वय से ही सृष्टि में संतुलन बना हुआ है।

उपवास विधान

रात्रि में उपवास करें। दिन में केवल फल लें और दूध पियें। भगवान शिव की विस्तृत पूजा करें, रुद्राभिषेक करें तथा शिव के मंत्र से यथा शक्ति पाठ करें और शिव महिमा से युक्त भजन गाएं। ‘ऊं नम: शिवाय’ मन्त्र का उच्चारण जितनी बार हो सके करें तथा मात्र शिवमूर्ति और भगवान शिव की लीलाओं का चिंतन करें। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की महादशा यानी आधी रात के वक़्त भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे, ऐसा ईशान संहिता में कहा गया है। इसीलिए सामान्यजनों द्वारा पूजनीय रूप में भगवान शिव के प्राकट्य समय यानी आधी रात में जब चौदस हो उसी दिन यह व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों पर महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और उन्हें उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। जिन लोगों पर महादेव की कृपा होती है, उनके जीवन में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहती है।

Related posts

भोजपुर:विकसित भारत संकल्प यात्रा के तहत गीधा मे मोदी गारंटी वान के माध्यम से मुद्रा लोन,प्रधानमंत्री सृजन रोजगार योजना लोन,गैस चूल्हा का हुआ वितरण।

rktvnews

आखिर क्यों चुप्पी साध गई पक्षियों की चहचाहट?

rktvnews

चतरा:उपायुक्त अबु इमरान व पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन द्वारा मंडल कारा चतरा में चलाया गया छापेमारी अभियान।

rktvnews

गौरेला पेंड्रा मरवाही : एक्जिट पोल के आयोजन और प्रसारण पर 30 नवम्बर तक प्रतिबंध।

rktvnews

“मेरी माटी मेरा देश” अभियान, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम 2024, मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा समेत अन्य महत्वपूर्ण विषयों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं पर उपायुक्त ने दिए आवश्यक दिशा निर्देश।

rktvnews

चितौड़गढ़:‘हरित चित्तौड़’ अभियान को लेकर जिला कलक्टर ने ली अधिकारियों की बैठक।

rktvnews

Leave a Comment