RKTV NEWS/आरा (भोजपुर) 24 मार्च।स्थानीय महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में फागोत्सव का आयोजन किया गया। प्रांगण स्थित ठाकुर जी की मूरत पर रंग अबीर व पुष्पों की बारिश कर रंग मचाया गया। शिवादि क्लासिक सेंटर ऑफ आर्ट एण्ड म्यूजिक की ओर से आयोजित इस् उत्सव में युवा गायिका श्रेया पाण्डेय ने राग भीमपलासी में झपताल विलंबित की बंदिश “करत बरजोरी आई होरी नंद क़े छैल” व शास्त्रीय पद्धति की होली को प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी।
वहीं विदुषी बिमला देवी ने राग खमाज में होली “रंग डालूंगी नंद क़े लालन पे व ” मैं तों खेलूंगी उन्हीं से होली गूइयां” प्रस्तुत कर समां बांधा। श्री महेश यादव ने विलंबित की होली कैसी है फाग मचाई बृज में कुंवर कन्हाई प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर श्री चम्द्रमोहन ओझा व गुरु बक्शी विकास ने संगत से रंग भरा।
वहीं कथक नृत्यांगना सह गुरु आदित्या श्रीवास्तव क़े निर्देशन में कथक शैली की नृत्य संरचना “ब्रज में फाग मचो री” की मनोहारी प्रस्तुति हुई। इस् प्रस्तुति में महाजन टोली का यह प्राचीन मंच वृंदावन का स्वरूप हो गया जहां कृष्ण क़े संग गोपियों की होली देख श्रोता भाव विभोर हो उठे। गोपियों की भूमिका में राका श्रीवास्तवा, आद्या, सोमी, शान्वी, हंसिका, अमृता, अंजली, सगुण श्रीवास्तव, सलोनी, मुस्कान व शालिनी ने कथक की विभिन्न मुद्राओं से कृष्ण राधा की होली को जीवंत किया। वहीं कृष्ण की भूमिका में कथक नर्तक अमित कुमार ने कृष्ण की भाव भंगिमाओं से दर्शकों का मन मोह लिया।
इस् अवसर पर डॉ जया जैन ने ने कहा कि जीवन में रंगों का बहुत महत्व है। शास्त्रीय संगीत में होली की कई रचनाएं हैं जो हमें रंगों क़े आध्यात्मिक भाव से जोड़ता है। अन्त में कथक नृत्यांगना आदित्या श्रीवास्तव ने राधा क़े अंतर्भाव को को प्रदर्शित करते हुये रंगों क़े स्वाभाविक अर्थ को नृत्य मुद्राओं क़े माध्यम से प्रदर्शित कर तालियां बटोरी। मंच संचालन गुरु बक्शी विकास व धन्यवाद ज्ञापन सुशील कुमार देहाती ने किया।



