
एक गृहणी की नजर से!
तुम कहते हो यह मकान तुम्हारा है
पर इसे घर तो हमने बनाया
माना कि पुत्र तुम्हारा है
पर सुपुत्र हमने बनाया
पूरी जिंदगी तुम धन अर्जन में लगे रहे
पर उसे सहेज कर रखना भी तो बड़ी बात है
घर में आकर तुम निश्चिंत हो जाओ
इसका ख्याल सदा रखा हमने
अगली सुबह उसी जोश से निकलो
तुम्हारे कदमों में बिछ गए हम
और तुम निकल गए अपने कर्म पथ पर
क्या अच्छा नहीं होता कि
एक बोसा ही रख देते माथे पर
कह देते कि ‘अपना ख्याल रखना’
तुम नहीं जानते ये तीन शब्द
मुझे तीनों लोक
का सुख दिला जाते हैं
खैर मैं फिर भी लगी रहूँगी
तुम्हारे मकां को
घर बनाने में।

