10 वर्षो में नौजवानों को रोजगार के नाम पर चुप्पी साधे और किसानों की आमदनी दुगनी करने के वादों से इतर उन्हीं किसानों से दिल्ली बॉर्डर पर दुश्मनों सा व्यवहार केंद्र सरकार की अक्षमता को करती है प्रदर्शित: शिवानंद
RKTV NEWS/अनिल सिंह 01 मार्च। पूर्व राज्यसभा सदस्य सह राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने अपने एक बयान में भाजपा के नेताओं और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा भगवान श्री राम के कुटिया से निकल महल में आ गए पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है की। भाजपा के राष्ट्रीय नेता और देश के रक्षामंत्री राजनाथ जी कहते हैं की रामलला कुटिया से निकल कर महल में आ गए। अब यहाँ रामराज आने से दुनिया की कोई ताक़त नहीं रोक सकती है।यह तो ठीक है. लेकिन रामराज का संविधान क्या होगा ? शिवानंद ने कहा की हमारे संविधान में तो रामराज की कोई कल्पना नहीं है।इसलिए स्वाभाविक है कि रामराज लाने के लिए बाबा साहब अंबेडकर के मौजूदा संविधान को गंगा में प्रवाहित करना पड़ेगा
उन्होंने कहा की राम के राज में वर्णाश्रम धर्म का उल्लंघन करने वाले शंबूक को क्या सजा मिली थी यह सबको स्मरण है। इसलिए एक दलित द्वारा लिखित संविधान राम के राज में कैसे चलेगा?
वैसे भी हमारे समाज में आलीशान महल में विराजमान राम की कल्पना नहीं है। शिवानंद ने कहा है की राम की लोगों के दिल में तो जंगलों में कोल, भील, बानर , भालू के साथ विचरने वाले राम की तस्वीर है. शबरी का जूठा बैर खाने वाले राम लोगों के दिल में बसते हैं।उन्होंने कहा की राजनाथ जी बताते हैं कि रामलला अब कुटिया से निकल कर महल में आ गए हैं।उस आलीशान महलनुमा मंदिर में शबरी प्रवेश करने का साहस कैसे जुटाएगी !
यह अजीब है कि दस वर्षों से देश का शासन चलाने वाले यह नहीं बताते हैं इन दस वर्षों में कितने नवजवानों को रोज़गार दिया।भाजपा के नेता यह नहीं बता रहे हैं कि जिन किसानों को आमदनी दोगुना कर देने का वायदा किया था आज उन्हीं किसानों के साथ दिल्ली के बॉर्डर पर दुश्मन की तरह क्यों व्यवहार हो रहा है ! दस वर्षों में सिर्फ़ मंदिर-मसजिद के नाम पर देश में तनाव पैदा किया गया है। उपलब्धि के तौर पर सिर्फ़ अयोध्या में मंदिर के नाम पर पुनः सत्ता में आने का जुगाड़ बैठाने की कोशिश हो रही है। लेकिन अब इनकी दाल गलने वाली नहीं है।

10 वर्षो में नौजवानों को रोजगार के नाम पर चुप्पी साधे और किसानों की आमदनी दुगनी करने के वादों से इतर उन्हीं किसानों से दिल्ली बॉर्डर पर दुश्मनों सा व्यवहार केंद्र सरकार की अक्षमता को करती है प्रदर्शित: शिवानंद