दायर परिवाद पत्र में जुर्माने के साथ साथ 2 से 3 वर्ष की सजा का है प्रावधान।
RKTV NEWS/अनिल सिंह, 27 फरवरी। देश के साथ साथ विदेशों में मीठी जुबान माने और बोली जाने वाली भोजपुरी भाषा की आड़ में आए दिन हो रहे अश्लील गीतों के प्रसारण से इसकी साख गिर रही है साथ ही इसके कारण भोजपुरी भाषा अश्लीलता की परिचायक होती नजर आ रही है। जबकि इस भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने हेतु कई भोजपुरी भाषी संगठन इसके लिए प्रयत्नशील है और अपने अपने स्तर से इसके लिए आंदोलनरत भी है।
एक तरफ वृहद संख्या में भोजपुरी भाषी संगठन के माध्यम से इसके अस्तित्व को बचाने और मान्यता हेतु अग्रसर है वही दूसरी तरफ भोजपुरी गीत के नाम पर करोड़ों लोगो के दिलों पर राज करने वाले भोजपुरी गायक भोजपुरी श्रोताओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर सोशल मीडिया पर एवं अपने गीतों और वीडियो की एल्बम जारी कर उसमे खुलेआम अश्लीलता परोस गाढ़ी कमाई कर रहे है और लोग मुकदर्शक बन देख रहे है।

इसी मिथक को तोड़ते हुए ऑल इंडिया अभिवावक संघ के अध्यक्ष सह आरटीआई कार्यकर्ता राकेश रॉय ने अश्लीलता के खिलाफ मुहिम छेड़ते हुए पटना सदर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष भोजपुरी कलाकार प्रमोद प्रेमी द्वारा स्टेज शो के दौरान एक गाने में खुलेआम अश्लीलता फैलाने को लेकर 21 फरवरी 2024 को एक परिवाद पत्र(2566/2024) दायर किया है। जिसमे आईपीसी धारा 292,293,294 लगाया गया है जिसके तहत दोष सिद्ध होने पर जुर्माना के साथ साथ 2 से 3 वर्ष की सजा का प्रावधान है।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए राकेश रॉय ने बताया की भोजपुरी जैसी मीठी भाषा इन जैसे कलाकारों के द्वारा दूषित की जा रही है।चुकी इनके देखने सुनने वाले में विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा होती है जिसका उन पर गहरा प्रभाव पड़ता है और उनको गलत दिशा में मोड़ता है।

इसे लेकर कई लोगों ने अपने सोशल मीडिया के द्वारा इसके विरोध में अपनी आवाज उठाने का प्रयत्न तो किया पर इनपर कोई असर न पड़ता देख मैंने आरटीआई ऐक्टिविस्ट होने के नाते न्यायालय में परिवाद दायर किया है। उन्होंने बताया की उन्होंने जब विडियो देखा तो लोगों ने बताया कि ये भोजपुरी कलाकार प्रमोद प्रेमी है। अगर इसके बाद भी भोजपुरी में इसी तरह अश्लिलता की हद ,खास कर बड़े कलाकारों के द्वारा की गई तो मैं उन सभी कलाकारों के विरोध में दुबारा कोर्ट जाऊंगा। राकेश रॉय ने अपने दायर प्रतिवाद के बारे में बताया की उन्होंने यह कदम भोजपूरी भाषा की गरिमा को बचाने के लिए उठाया है।

दायर परिवाद पत्र में जुर्माने के साथ साथ 2 से 3 वर्ष की सजा का है प्रावधान।