भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि हम राम में कृष्ण और सीता में राधा भी देखते हैं:डॉ विकास दवे
किस्से, कथा, कहानी और गाथा जीवन में रस घोलते हैं: डॉ उमेश कुमार सिंह
भोपाल/ मध्यप्रदेश 07 फरवरी।भोपाल गद्य प्रवाह मंच के तत्वावधान में मुकेश वर्मा की अध्यक्षता, डॉ विकास दवे के मुख्य अतिथि और डॉ उमेश कुमार सिंह के विशिष्ट अतिथि में नरेश मेहता कक्ष हिंदी भवन जनक कुमारी सिंह बघेल के कहानी संग्रह “दास्तान” का लोकार्पण संपन्न हुआ।
सर्व प्रथम अतिथियों का स्वागत पुष्प-पुस्तक भेंट देकर किया। शेफालिका श्रीवास्तव ने आगंतुक साहित्यकारों का स्वागत किया। उसके बाद अतिथियों ने कहानी संग्रह “दास्तान” का लोकार्पण किया गया।
मुकेश वर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि इस किताब में सम्मिलित कहानियाँ घर पड़ौस और रिश्तों के क़िस्से हैं। जो सरल ओर सरस हैं।
मुख्य अतिथि डॉ विकास दवे में कहा कि यह भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि हम राम में कृष्ण और कृष्ण में राम के साथ राधा में सीता और सीता में राधा को देखते हैं। यह मानवीय मूल्यों की पराकाष्ठा है।
सारस्वत अतिथि डॉ उमेश कुमार सिंह ने जनक कुमारी सिंह बघेल के सृजन कर्म पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं की साहित्य में उपस्थिति हेतु मध्य प्रदेश लेखिका संघ की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किस्से, कथा, कहानी और गाथा शब्दों का ज़िक्र करते हुए बताया कि ये सभी मानव जीवन में रस घोलते हैं।
गद्य प्रवाह की अध्यक्ष मधुलिका श्रीवास्तव ने इस अवसर पर गद्य प्रवाह मंच की स्थापना और विकास क्रम को प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसमें देश भर 95 सदस्य हैं जो दैनिक आधार पर सृजन और समीक्षा कार्य में साहित्य रस का आनंद लेते हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश पटवा ने अपनी पंद्रह किताबों का सेट गद्य प्रवाह मंच को भेंट किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों और साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी, डॉ मोहन तिवारी आनंद, मनोरमा पंत, अनीता सक्सेना, प्रेम चंद गुप्ता, चरण जीत सिंह कुकरेजा, अशोक निर्मल, मीनू पांडे इत्यादि उपस्थित रहे।
गद्य प्रवाह मंच की संयोजिका और पुस्तक की लेखिका जनक कुमारी सिंह बघेल ने लोकार्पित कृति के बारे में बात करते हुए अपने रचना कर्म के बारे में विस्तार से बताया।
कमल चंद्रा ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहानी संग्रह में समाहित कहानियों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए इन्हें समीचीन समाज का दर्पण कहा। उन्होंने कहानियों के वाक्य विन्यास में बदलाव की गुंजाइश बताई। उदीयमान साहित्यकार मुज़फ़्फ़र सिद्दीक़ी में कार्यक्रम का सरस संचालन किया।


