दिल के भीतर शोर बड़ा!
होंठों पे है मौन भले ही,दिल के भीतर शोर बड़ा।
यहाँ भीड़ में सभी अकेले, यूँ तो है संसार खड़ा।।
भागमभाग में भूले फुर्सत,
बस पैसों की हरदम भूख।
नहीं झलकता अपनापन भी,
कड़वाहट की रहती हूक।।
लूटो-खाओ, मौज मनाओ, स्वारथ से हर डगर भरा।
जरूरत के सुख-साधनों से,
सजा हुआ बाजार यहाँ।
प्रतिस्पर्धा में हुए व्यस्त हैं,
खूब लगे कलदार यहाँ।।
ये भी ले लें, वो भी ले लें, लालच है परवान चढ़ा।
दुनिया जैसी थी वैसी है,
हम ही केवल हैं बदले।
हम ही ने खोजे जो साधन,
उन्हीं में हम हैं उलझे।।
नेक नीयत का पथ छोड़ के,भ्रमित हो, मन निकल पड़ा।
नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा,
जिला-नरसिंहपुर.म.प्र.

दिल के भीतर शोर बड़ा!