वैशाली/बिहार 23 जनवरी।बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त परिवाद की द्वितीय अपील की सुनवाई करते हुए आज जिलाधिकारी यशपाल मीणा के द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी पटेढी बेलसर और अंचलाधिकरी राघोपुर पर दस-दस हजार रू० का आर्थिक दंड लगाया गया। परिवादी ओम प्रकाश साह के द्वारा बताया गया कि पूर्व ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक पटेढ़ी बेलसर अतुल कुमार का एनएससी प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा वापस नहीं किया गया है। जिसपर द्वितीय अपील मे सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी के द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी के कार्यालय द्वारा लापरवाही सामने आयी है। आज परिवादी के द्वारा बताया गया कि प्रखंड कार्यालय जाने पर उन्हें फटकार लगाया जाता है। जिसको जिलाधिकरी ने गंभीरता से लेते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी पटेढ़ी बेलसर से स्पष्टीकरण की माँग करते हुए दस हजार रू० का अर्थ दण्ड लगाया गया एवं सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की गयी।
राघोपुर के वरूण कुमार का मामला परिमार्जन नहीं करने से संबंधित था। सुनवाई के क्रम में पाया गया कि पिछली सुनवाई में दिये गये आदेश के अनुपालन में अंचलाधिकारी राघोपुर के द्वारा कोई ठोस या वास्तविक कार्रवाई नहीं की गयी है। उनके प्रतिवेदन से स्पष्ट हो रहा था कि उनके द्वारा परिवाद के निराकरण में कोई अभिरूचि नहीं ली गयी है। इस पर जिलाधिकारी के द्वारा अंचलाधिकारी राघोपुर पर दस हजार रू० का आर्थिक दण्ड लगाते हुए सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की गयी।
ओम प्रकाश साह बनाम भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, हाजीपुर का विषय लगान निर्धारण अभिलेख त्रुटि निराकरण से संबंधित था। भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, हाजीपुर के द्वारा बताया गया कि त्रुटि निराकरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज परिवादी के द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है। जिसपर जिलाधिकारी के द्वारा परिवादी को सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की गयी। राजापाकर के सीताबलाल राय के द्वारा अवरूद्ध रास्ता को अतिक्रमण मुक्त करने का आवेदन दिया गया था। आज द्वितीय अपील में अंचलाधिकारी राजापाकर के द्वारा बताया गया कि विगत 16 जनवरी को रास्ता अतिक्रमण मुक्त करा दिया गया है। जिलाधिकारी के द्वारा परिवाद को समाप्त करते हुए इसे आदेश में रखने का निर्देश दिया गया। एक अन्य मामले में जो ग्राम पंचायत राज एतवारपुर सिसौला (लालगंज) में पंचायत सरकार भवन निर्माण के बाद श्रमिक भुगतान नहीं किये जाने से संबंधित था। जिसपर जिलाधिकारी के द्वारा दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए परिवादी सुरेन्द्र साह को उपयोगिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की गयी।


