जीविका समूह ने बनाया स्वावलंबी,दिलाई पहचान: सुलोचना देवी
लखीसराय/बिहार( रौशन कुमार) 06 जनवरी।विपरीत परिस्थितियों में भी सुलोचना देवी ने अपनी पहचान एक कुशल व्यवसाई के रूप में बनाई है।50 वर्षीय सुलोचना देवी लखीसराय जिला अंतर्गत सदर प्रखंड स्थित महिसोना गाँव की रहने वाली हैं। पति सुबोध कुमार ऑटो चालक थे। सड़क दुर्घटना में उनका एक पैर नहीं रहा।लिहाजा सुलोचना के लिए आर्थिक तंगी एक बड़ी समस्या के रूप में आ गई थी। सुलोचना वर्ष 2015 से ही शांति जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुडी हैं।आर्थिक समस्या से मुक्ति के लिए उन्होंने अपने समूह से सब्जी दुकान के लिए 20 हजार रूपया ऋण लिया और अपने परिवार के लिए सबल बनी।सब्जी दुकान से हुए मुनाफे से उन्होंने ऋण की राशी चुकता कर दी।पुन:अपने दुकान को बड़ा आकार देने के लिए सुलोचना देवी ने समूह से 20 हजार रूपया का ऋण लिया और इस राशी से उन्होंने दुकान को बड़ा स्वरुप देते हुए उसमे किराना दुकान भी खोल लिया।अब दोनों दुकान से उनकी आमदनी बढ़ने लगी।मुनाफे की राशी से उन्होंने समूह से ली गई 20 हजार रुपये की राशी को सूद समेत वापस कर दिया।
अब उनके पति और वो मिलकर सब्जी और किराना दुकान चलाने लगे।इस दौरान सुलोचना देवी ने अपने एक बेटे की शादी भी कर दी,दो बेटियां इंटर की छात्रा हैं ।एक बार फिर सुलोचना ने व्यवसाय बढ़ाने की सोची और समूह की बैठक में इसकी चर्चा करते हुए 40 हजार रूपया ऋण लेकर रेडीमेड कपडे की दुकान खोल ली। अब सब्जी दुकान, किराना दुकान एवं कपडे की दुकान से इन्हें प्रति माह लगभग15 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा हो रहा है l उनके द्वारा समूह से लिए गए 40 हजार रुपये के ऋण को भी चूका दिया गया।ऋण लेकर समय पर चूका देने के कारण इनकी साख एवं विश्वसनीयता भी बढ़ी है। सब्जी गाँव के खेत से ही खरीद लेती हैं। किराना दुकान का सामान शहर से थोक भाव में खरीद लेती हैं।रेडीमेड कपडा उनका बेटा थोक भाव में कोलकाता से खरीद कर लाता है l सुलोचना बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह ने उनके जीवन में खुशहाली लाई है और उनकी सोच को बड़ा आकार दिया है।सुलोचना ने बताया की पति के सड़क दुर्घटना में पैर गंवाने के बाद आई आर्थिक तंगी से जीविका ने मुक्ति दिलाई है। छोटी सी गुमटी ने उन्हें कुशल व्यवसाई के तौर पर पहचान भी दिलाई है।लखीसराय- जमुई मुख्य मार्ग के किनारे स्थित बहुउद्देसीय दुकान में ताज़ा सब्जियों के साथ शुद्ध एवं असली किराना के सामान मिलते हैं।लिहाजा इनकी दुकान खरीददारों की पहली पसंद हैं।अपने दुकान पर सुलोचना देवी महिला स्वावलंबन के साथ ही महिला सशक्तिकरण की बानगी पेश करती हुई नज़र आती हैं। समूह की बैठकों में वो ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार करने के लिए प्रेरित करने के साथ ही कुशल व्यवसाई बनने का गुर भी सिखाती हैं।


जीविका समूह ने बनाया स्वावलंबी,दिलाई पहचान: सुलोचना देवी