गया/बिहार 26 नवंबर।” बिहार प्रतिरोध की संस्कृति की धरती रही है। यहां क्रांति और प्रतिक्रांति के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। यहाँ बुद्ध ने जो सामाजिक क्रांति की, उसे शंकराचार्य ने प्रतिक्रांति में बदल दिया। इस प्रतिक्रांतिकारी वर्चस्व के विरुद्ध प्रतिरोध की संस्कृति को विकसित करना ही आज जन संस्कृति का प्रमुख कार्यमार होना चाहिए। इसलिए कि आज वर्चस्व की संस्कृति तानाशाही में तब्दील हो गयी है। पहले भी पलटूदास और मीराबाई की हत्या वर्चस्व की सत्ता संस्कृति ने की थी।
बिहार के प्रतिरोधी जनकवि नागार्जुन को आज याद किया जाना चाहिए। आज वे होते तो तानाशाह सत्ता उन्हें जेल में डाल देती या हत्या कर देती। लेकिन इस तानाशाही और वर्चस्व को कबीर और नागार्जुन की प्रतिरोधी संस्कृति की राह पर चलकर ही खत्म किया जा सकता है।” ये विचार जनसंस्कृति मंच के छठे बिहार राज्य सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ आलोचक प्रो. चौथीराम यादव ने व्यक्त किये।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को वरिष्ठ नाटककार राजेश कुमार, जनवादी लेखक संघ, झारखंड के राज्य अध्यक्ष प्रो. अली इमाम, वरिष्ठ कर्मचारी नेता श्यामलाल जी, लोकयुद्ध के संपादक संतोष सहर, जसम के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह, उर्दू के वरिष्ठ लेखक सरवर हुसैन, जसम, बिहार के निवर्तमान अध्यक्ष जितेंद्र कुमार, समकालीन जनमत के संपादक मंडल सदस्य सुधीर सुमन, वरिष्ठ लेखक सुनील कुमार, गजाली अनवर हिलाल ने भी संबोधित किया।
उद्घाटन सत्र में मंच पर डॉ. नुसरत परवीन, मीडियाकर्मी प्रीति प्रभा, जसम, पटना के सचिव राजेश कमल, तुफैल अनवर और सूफिया नाज भी मौजूद थे।
उद्घाटन से पूर्व उर्दू-हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक और जसम के राष्ट्रीय पार्षद अहमद सगीर ने स्वागत वक्तव्य दिया। इसके बाद जसम की राष्ट्रीय पार्षद और समकालीन जनमत की प्रबंध संपादक मीना राय, चित्रकार राकेश कुमार दिवाकर, आलोचक रामनिहाल गुंजन, जनकलाकार अनूप नंदन समेत उन साहित्यकारों-कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों को एक मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया गया। इजराइल द्वारा फिलिस्तीनी जनता के जनसंहार पर भी शोक जाहिर किया गया। इसके बाद अनिल अंशुमन, प्रमोद यादव, निर्मल नयन, विजय कुमार सिन्हा, राजन ने गोरख पांडेय के गीत- ‘ हमारे वतन की नयी जिंदगी हो’ को गाया।
उद्घाटन सत्र का संचालन रंगकर्मी दीपक सिन्हा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन हरेंद्र गिरी शाद ने किया।
पहले दिन के दूसरे सत्र में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुई। कल 27 नवंबर को सम्मेलन का सांगठनिक सत्र होगा। सम्मेलन के सभागार का नाम राम निहाल गुंजन के नाम पर रखा गया है। सम्मेलन के मंच को अब्दुल हिलाल मंच नाम दिया गया है। गया नगर को मैनेजर पांडेय नगर नाम दिया गया है। सम्मेलन में बिहार के विभिन्न जिलों से प्रतिनिधि पहुँचे हैं।

