खैरागढ़ विश्वविद्यालय में हुआ ICCR और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 15 दिसंबर। पं. ईश्वरलाल मिश्र की स्मृति में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़, भारतीय सांस्कृतिक सम्बंध परिषद (आईसीसीआर) व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में कल सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में के. अय्यनार क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद नई दिल्ली उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा एवं राजकुमारी इंदिरा के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. मंगलानंद झा द्वारा लिखित पुस्तक संग्रहालय आज, कल और आज का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया जिसके लेखन में डॉ. चैनसिंह नागवंशी ने सहयोग दिया था।
इसके बाद रामकृष्ण पटेल ने महान तबला वादक एवं बनारस घराने के प्रतिनिधि कलाकार पं. ईश्वर लाल मिश्र का संक्षिप्त जीवन परिचय दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों में गुरु के प्रति निष्ठा है और उनकी कड़ी तपस्या है, जिसके कारण वे बहुत कुछ प्राप्त कर रहे हैं। देश के अधिकतर शैक्षणिक संस्थानों में हमारे विश्वविद्यालय का कोई न कोई चीज जरूर मिलता है। आईसीसीआर के साथ मिलकर हम कई कार्य कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की खासियत है कि यहां शासन-प्रशासन से बेहतर सहयोग मिल रहा है।
आईसीसीआर के क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) के. अय्यनार ने कहा कि जब से उन्होंने क्षेत्रीय निदेशक का कार्यभार संभाला है छत्तीसगढ़ में उनका यह पहला कार्यक्रम है। महान तबला वादक पं. ईश्वर लाल मिश्र को समर्पित यह कार्यक्रम बहुत ही खास है। उन्होंने यह कार्यक्रम आयोजित करने हेतु उन्हें मौका देने पर विश्वविद्यालय का आभार जताया।
उस्ताद जौहर अली के बेला वादन व प्रो. भगवान दास के कथक नृत्य ने दर्शकों का मन मोहा
कार्यक्रम के उद्घाटन पश्चात उस्ताद जौहर अली के बेला वादन व प्रो. भगवान दास के कथक नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। सर्वप्रथम नई दिल्ली से पहुंचे उस्ताद जौहर अली खान ने राग मधुवंती सहित विभिन्न रागों पर बेला वादन किया। कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके उस्ताद जौहर अली ने एक ही धुन को अलग-अलग देशों के अंदाज में बजाया, जिसने खूब तालियां बटोरीं। इसके बाद ग्वालियर से पहुंचे प्रो. भगवान दास माणिक ने ताल तीन ताल में विशिष्ट बंदिश, नवरस रचना, रस पंचानन, नाग राग, शट कद, कुमकुम, पंच राग, घुमड़ बादल, शंख ध्वनि, अमृत ध्वनि, मधुकरी, सुरंग व हस्त शिखर सहित विभिन्न रागों पर कथक की प्रस्तुति दी। इस दौरान डॉ. मानव दास महंत ने कथक नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी।
डॉ. लिकेश्वर वर्मा संयोजक सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं डॉ. कौस्तुभ रंजन विश्वविद्यालय आई.सी.सी.आर प्रभारी ने कार्यक्रम का संचालन किया। आभार प्रदर्शन डॉ. लिकेश्वर वर्मा ने किया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. मुकुंद भाले, अधिष्ठाता प्रो. नमन दत्त, कार्यक्रम आयोजन समिति सदस्य डॉ. जितेश गढ़पायले व संदीप किंडो, सहायक प्राध्यापक सुशांत दास, डॉ. मंगलानंद झा व डॉ. छगेंद्र उसेंडी सहित शिक्षकगण, संगतकारगण, अधिकारी-कर्मचारीगण, अतिथि व्याख्यातागण, शोधार्थीगण व विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

