आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 21 अक्टूबर।बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री की जयंती श्री कृष्णा सिंह स्मृति प्रदेश न्यास परिषद भोजपुर के तत्वावधान में ब्रह्मर्षी कॉलेज के सभागार में पूर्व प्राचार्य प्रो राम बहादुर शर्मा की अध्यक्षता में मनाई गई। इसअवसर पर अनेक शिक्षाविद,सामाजिक,कार्यकर्ता ,छात्र-छात्राओं की विशेष उपस्थिति रही।
उद्घाटन कर्ता के रूप में वीकेएसयू आरा के कुलपति प्रो शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी उपस्थित रहे। सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन, श्री कृष्णा बाबू के चित्र पर माल्यार्पण और और परिषद द्वारा उपस्थित गणमान्य लोगों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
उद्घाटन करता प्रो शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए श्री बाबू के योगदान की विस्तार से चर्चा की।उन्होंने बताया कि उनके सोच का बिहार और आज का बिहार देख लीजिए।श्री बाबू बिहार के पहले प्रथम मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री , महान स्वतंत्रता सेनानी, बिहार के नव निर्माता थे।यहां आकर मुझे मालूम पड़ा कि श्री कृष्णा बाबू भूमिहार जाति के थे। कुछ लोग इन्हें जाति के बंधन में बांधना चाहते हैं लेकिन श्री बाबू बिहार के गौरव हैं। बिना जाति पाति वर्ग को कंट्रोल किए हुए भारत विश्व गुरु नहीं बन सकता है।
प्रो बलराज ठाकुर ने कहा कि कुछ लोगों ने उनके लड़के को चुनाव लड़ने के लिए कैंडिडेट बनाया इस पर इन्होंने कहा कि मेरा नाम लिस्ट से हटा दीजिए। वे जाति और परिवारवाद से काफी दूर थे।
वरीय अधिवक्ता श्री लक्ष्मी नारायण राय ने कहा की वे भुमिहार शब्द से डरे रहते थे।
एस बी कॉलेज की प्राचार्या प्रो डा पुनम कुमारी ने श्री बाबू को नमन करते हुए उपस्थित गणमान्य अतिथियों का स्वागत और आभार प्रकट किया।
मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य प्रो गांधी जी राय ने डा श्री कृष्णा सिंह के जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण जानकारियों को विस्तार से रखा। इन्हें जाति की सीमा में नहीं बांधा जा सकता है। सच्चे राजनेता, सामाजिक न्याय के प्रणेता, जमींदारी उन्मूलन, परिवार वाद के घोर विरोधी,
तथा उनके निधन पर खोले गये तिजोरी मे कुल 24500 रु,चार लिफाफा पर नाम लिखकर रखा था ,ये थी उनकी ईमानदारी।
मुख्य वक्ता प्रो जंग बहादुर पांडेय ने कहा की इनके व्यक्तित्व और कृतित्व का दूसरा कोई नजर नहीं आता है।बड़ा व्यक्ति जाति का नही समाज और राष्ट्र का होता है। आजीवन प्रधान सचिव दूसरे जाति, पुत्र द्वय को राजनीति से दूर, समाज सुधार का मूलाधार शिक्षा को मानते हुए नेतरहाट,बीआईटी,एम आईं टी, विकास के लिए एचईसी, बरौनी,सिंदरी कारखाना, जमींदारी उन्मूलन,देवघर मंदिर में हरिजन का प्रवेश, स्वतंत्रता आंदोलन मे चार साल जेल आदि महत्वपूर्ण यादें हैं। लेकिन श्री बाबू का सपना वैसे ही रह गया।
अध्यक्षीय भाषण पूर्व प्राचार्य प्रो राम बहादुर शर्मा ने छुटी हुई कुछ चुनिंदा चुनाव की चर्चाओं को स्मरण दिलाया। अन्य प्रमुख वक्ताओ में प्रो बलराज ठाकुर,प्रो दिवाकर पांडेय,शिवदास जी,प्रो किरण कुमारी, जीतेन्द्र जी, नवीन कुमार, आदि रहे। पांच लोगों को मानद उपाधि से प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। संचालन महान वक्ता, कुलसचिव प्रो रणविजय कुमार, स्वागत डा संजय तथा धन्यवाद मुक्तेश्वर उपाध्याय ने किया।
