आरा/भोजपुर 12 अक्टूबर।स्वर लय व ताल के संगम में दर्शकों ने गोते लगाए। अवसर था लीजेंड बक्शी कुलदीप नारायण सिन्हा मेमोरियल कल्चरल सोसायटी के द्वारा स्थानीय महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रम गुरुवासरे संगीत सभा का। इस कार्यक्रम मुख्य कलाकार शास्त्रीय गायक श्री बृजेन्द्र महाराज ने दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर ब्रजेन्द्र महाराज ने कहा कि शास्त्रीय संगीत सुनने से साकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वहीं रागों के श्रवण से कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है। भारतीय संगीत के इतिहास ने ऐसे कई प्रामाणिक उदाहरण मिलते हैं जहां रागों के प्रभाव से दीप जल गये तो दूसरे रागों के प्रभाव से वर्षा करायी गई। कार्यक्रम के मुख्य कलाकार ब्रजेन्द्र महाराज ने राग दरबारी में बड़ा ख्याल “बाकी चितवन नैना”
छोटा ख्याल “झन झनकवा मोर बिछुआ” तराना,
राग मेघ मल्हार में बंदिश “घनन घनन घनन घन घोर घोर घन”, राग मिश्र खमाज में ठुमरी कौन गली गए श्याम व दादरा कैसे डगर बीच चलूं मग रोके कन्हैया बेपीर प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच संचालन शंभू शरण ओझा व धन्यवाद ज्ञापन आदित्या श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर विदुषी बिमला देवी, गुरु बक्शी विकास, अमित कुमार, शास्त्रीय गायक महेश यादव रवि शंकर, स्नेहा पाण्डेय, उस्ताद निजामुद्दीन खां, कलामुद्दिन खां, श्री कृष्णकांत मानस संरक्षक सुशील कुमार ‘देहाती’, प्रोफेसर विश्वनाथ राय, श्रेया पाण्डेय, अभय तूफानी समेत कई संगीत रसिक उपस्थित थे।
