“निजी शिक्षक बंधुआ मज़दूर हैं,
दस हज़ार महीना में घर चलाते हैं?”
एक नोटिस से बाहर हो जाते हैं- सुरेश पटवा, अध्यक्ष, काव्य गोष्ठी
मेरी प्यास एक साँस बनकर आती है
समूचे अस्तित्व को निगल जाती है- विनोद जैन मुख्य अतिथि काव्य गोष्ठी
भोपाल/मध्यप्रदेश 05 सितंबर।रंजन कलश साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में पिपलानी जैन मंदिर परिसर में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन प्रबुद्ध साहित्यकार सुरेश पटवा की अध्यक्षता और कवि विनोद कुमार जैन के मुख्य आतिथ्य और तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुई।
काव्य गोष्ठी में उपस्थित नगर के प्रबुद्ध रचानाकारों ने रचना पाठ किया। विनोद जैन द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुति उपरांत काव्य पाठ का आरंभ सुरेश सोनपुरे की रचना “खूब पढ़ो अंग्रेज़ी भैया पर हिंदी को ना भूलो”, सी.पी. सी. चौहान ने “बहू बेटे के इंतज़ार में माँ सोई नहीं, शहर में ख़ाली दीवारें हैं रहने वाला कोई नहीं”, सत्य प्रकाश सक्सेना “चिराग़” ने “एक प्रश्न शिक्षक दिवस का”, डॉक्टर आनंद सिंह गौतम ने “जिसका जिसका पद बड़ा उसको उतनी छूट, खुली पड़ी तिजारी लूट सके तो लूट”, अशोक व्यास ने “एक पल भी अलग ना हुई दिल से तुम्हारी याद”,
भोपाल में ग़ज़ल के हक्ताक्षर डॉक्टर किशन तिवारी ने “चाहते हो तुम कहाँ जाना ये बतलाते नहीं”, और सच की राह पर साथ आते नहीं”, ग़ज़लकार सुरेश पबरा ने “नहीं डरते फ़लाँ से फ़लाँ से, बहुत टकराए हैं शाहजहाँ से”, सुभाष दुबे ने “शिक्षक शिक्षा शिक्षार्थी”, अशोक व्यग्र ने “युग युग से जिससे नाता है”, दिनेश भगौरिया ने “कसौटी पर जब कसा जाता है शिक्षक”, राजेश तिवारी ने “ज्ञान धन देकर सवारा ये चमन देख के सारे गुरुजन को नमन”, डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद ने “हरि राम और सिया राम में कोई फर्क नहीं दिखता है।”, सुशील गुरु ने “सागर पहाड़ वन उपवन देश कहलाते हैं” कविताएँ सुनाईं।
