
शाहपुर/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 26 अगस्त। शिक्षक दिवस के अवसर पर “शिक्षक सम्मान” परिचर्चा की कड़ी में शाहपुर में पदस्थापित शाहपुर की अवर थानाध्यक्ष पूनम कुमारी ने बताया कि माॅ ही पहली शिक्षिका होती है और घर पहला स्कूल। घर में माता-पिता ही तौर- तरीका और बात-व्यवहार सीखाते हैं। माता-पिता ही संस्कार देते हैं। जीवन में तौर-तरीका, बात-व्यवहार और संस्कार का बहुत महत्व है। सिर्फ शिक्षित होना ही काफी नहीं होता है।

शिक्षा के अलावा यदि बात-व्यवहार, तौर-तरीका और संस्कार नहीं हो तो वैसे व्यक्ति को समाज में समुचित सम्मान नहीं मिलता है। अवर थाना अध्यक्ष पूनम कुमारी ने बताया कि मैं अपना आदर्श अपने माता-पिता को मानती हूं। माता-पिता की प्रेरणा के बदौलत ही मैं आज इस मुकाम तक पहुंच सकी। शुरुआती दौर की बात की जाय तो मेरी माता श्रीमती पानपति देवी और पिता श्री महंथ सिंह शुरू से ही मुझे पढ़ाने के लिए काफी तत्पर और सजग रहते थे। बचपन से ही मेरे माता-पिता ने मुझे गांव से शहर लाकर शिक्षा दिलवाई। मेरी शिक्षा – दीक्षा छपरा में हुई। मेरे पिताजी इंग्लिश मे ऑनर्स थे। वे रेलवे मेल सर्विस (आरएमएस) में सब रिकॉर्ड ऑफिसर थे।
मैंने दरोगा की तैयारी करने के लिए छपरा शहर के प्रसिद्ध टीचर एमके सिंह (मनोज कुमार सिंह) का कोचिंग “स्टडी प्वाइंट” ज्वाइन किया।

कोचिंग करने के दौरान एमके सिंह सर ने उचित मार्गदर्शन के साथ-साथ हमेशा मनोबल को बढ़ाया। उन्हीं की प्रेरणा और प्रोत्साहन से मैं दरोगा की परीक्षा पास कर सकी और आज इस पद पर हूॅ। मैं अपने जीवन में अपने माता-पिता के बाद अपना आदर्श अपने गुरु एमके सिंह सर को मानती हूॅ।
जिस तरह से शिक्षक अनेकों बार कक्षा में विद्यार्थियों को पढाकर और निखार कर उन्हें अपने मुकाम एवं मंजिल तक पहुंचाते हैं, उसी तरह अनेकों प्रयास के बाद चंद्रयान – 3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग में सफलता मिली।
