चतरा /झारखंड 22 अगस्त।इटखोरी:देवरी डुमरी फील्ड फायरिंग रेंज पर राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पार्टी के चतरा लोकसभा एवं सिमरिया चतरा विधानसभा में बड़े नेताओं की चुप्पी ने यह साबित कर दिया कि अब ये नेता जननेता ना रह कर पार्टी के आदेश का अनुकरण एवं सही साबीत करने वाले बन कर रह गए है, तभी तो कोई मुख्य सचिव को पत्र दे आता है तो कोई मुंह पर ताला लगा पार्टी के तरफ से जारी बयान के इंतजार में जनता से दूर इधर उधर भागे फिर रहे है। इतनी विकट समस्या पर किसी ने यह बताना भी उचित नही समझा कि इसके कोई दुष्परिणाम है भी या नही? जबकि इनकी पहचान ही पूरे भारतवर्ष में जनप्रतिनिधि के तौर पर है किंतु ये अब पार्टी प्रतिनिधि बन कर रह गए है।सांसद एवं विधायक जनता की आवाज होते है किन्तु इन्हें क्या? पांच वर्ष में शायद ही जनता का राय ले सरकार तक पहुंचाया हो?हां सरकार का फरमान ले ये जनता के बीच समय समय पर जाते जरूर दिखाई पड़ते है। लोकतंत्र को राजशाही में कब पुनः परिवर्तित कर दिया किसी को खबर तक न लगी। इस विडम्बना एवं नसमझने वाली परिस्थिति में बस चतरा का एक प्रतिनिधि जनता के बीच नजर आया और वो है चतरा जिला परिषद उपाध्यक्ष ब्रजकिशोर तिवारी। यह सच है कि जनता के बीच इनकी उपस्थिति से जिला प्रसाशन ने आनन फानन में मेजर को बुला थोड़ी ही सही स्थिति को संभालने की कोशिश की है,किन्तु अभी पूरी स्थिति स्पष्ट नही, जबतक इक्कीस,बाइस,ताइस एवं चौबीस अगस्त को प्रभावित अंचल में जा कर मेजर जनसमूह के बीच फील्ड फायरिंग पर पूरी बात नही रख देते तब तक कुछ भी समझ पाना नामुमकिन है। जनसमूह के बीच ब्रजकिशोर तिवारी को देख यह भी सम्भव है कि लोकसभा चुनाव नजदीक आता देख जिसने भी इस मुद्धा को भुनाना चाहा उसकी चाल उल्टी पड़ गयी और उन्होंने इसे जिला प्रसाशन के माध्यम से अविलम्ब अफवाह करार दिया पर स्वयं सामने आ कर जनता से वार्तालाप करना मुनासिब नही समझा।

