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पिछले सप्ताह संसद में पारित अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) अधिनियम का उद्देश्य अनुसंधान से संबंधित पहलुओं के लिए समान धन और संसाधन प्रदान करना है: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली/18 अगस्त।पिछले सप्ताह संसद द्वारा पारित “अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन” (एएनआरएफ) अधिनियम का उद्देश्य अनुसंधान और शिक्षाविदों में संसाधनों का समान वित्तपोषण और लोकतंत्रीकरण करना है।
यह बात केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए क्षमता निर्माण पर आयोजित एक कार्यशाला में मुख्य भाषण देते हुए कही।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के प्रौद्योगिकी आधारित विकास के लिए अधिक से अधिक निजी अनुसंधान संस्थाओं को सरकारी वैज्ञानिक विभागों के साथ मिलाने का आह्वान किया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए समान वित्त पोषण और अधिक निजी भागीदारी लाने का भी आह्वान किया।
मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) भारत को नए क्षेत्रों में नए शोध का नेतृत्व करने वाले विकसित देशों की श्रेणी में पहुंचा देगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एएनआरएफ को विभिन्न कंपनियों को अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार एक अद्वितीय सार्वजनिक निजी भागीदारी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप -पीपीपी) इकाई की योजना बना रही है, जिसके लिए अनुसंधान निधि का 36,000 करोड़ रुपए निजी क्षेत्र, विशेषकर उद्योग जगत से आना है, जबकि सरकार उद्योग जगत की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 14,000 करोड़ रुपए लगाएगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बदलाव की गति इतनी तेज है कि भारत अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकता और अब समय आ गया है कि सार्वजनिक और निजी संस्थाओं का सीमांकन समाप्त किया जाए। उन्होंने तकनीकी-आधारित समृद्ध भारत के निर्माण के लिए सार्वजनिक और निजी प्रयोगशालाओं के बीच विचारों के सार्थक आदान-प्रदान का आह्वान किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि वैज्ञानिकों को अनुसंधान के प्रति व्यक्तिगत दृष्टिकोण के बजाय समस्या के समाधान और उत्पाद विकास के लिए टीम संचालित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस क्षमता निर्माण बैठक में वैज्ञानिक विभाग के सभी प्रमुखों के साथ-साथ बड़ी संख्या में वैज्ञानिक भी ऑनलाइन शामिल हुए। मंत्री ने वैज्ञानिक समुदाय से कॉर्पोरेट क्षेत्र की अच्छी बातों और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि क्षमता निर्माण के अवशोषण की सीमा को परिभाषित किया जाना चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत अब विश्व के विकसित देशों के साथ मिलकर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकीय प्रगति कर रहा है और इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) और अंतरिक्ष क्षेत्र में मिली अंतरराष्ट्रीय ख्याति का उदाहरण दिया।
मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम प्रौद्योगिकी में निवेश से हमारे दैनिक जीवन में परिवर्तनकारी प्रगति होगी और इससे स्वास्थ्य देखभाल, कृषि, जलवायु परिवर्तन और अन्य पर प्रभाव डालकर हमारे सामाजिक कल्याण को काफी लाभ होगा। उन्होंने बंदोबस्ती निधि (एंडोमेंट फंड) की परिवर्तनकारी क्षमता का स्वागत किया।
क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) के अध्यक्ष आदिल ज़ैनुलभाई, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय सूद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. राजेश गोखले, क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) में सदस्य (प्रशासन) प्रवीण परदेशी और कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारियों ने इस कार्यशाला में भाग लियाI

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