आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 17 अगस्त।गाजर घास जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत ग्राम खेसरिया के कोईलवर प्रखंड में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर द्वारा हुआ। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया की गाजर घास अर्थात पारथेनियम घास सड़क से लेकर के खेतों तक फैल चुकी है। इसके जड़ से निकलने वाले रस के कारण खेतों की उर्वरा शक्ति प्रभावित होता है और शरीर के संपर्क में आने पर त्वचा से संबंधित कैंसर के भी कारण बन सकते है।ग्रामीण क्षेत्रों में फेफड़ों से संबंधित संक्रमण मुख्य कारण गाजर घास का पराग है ।
इसका एक पौधा 35000 तक बीज पैदा करता है।अगर दो से चार पौधे भी आपके क्षेत्र में हैं तब अगले ही मौसम में हजारों की संख्या में आपके खेत में यह पौधे दिखाई देंगे ।
दूसरे वैज्ञानिक शशि भूषण कुमार शशि ने कहा कि जब खेत में इसके छोटे पौधे देखें उसी समय में खाली खेत में रसायनिक दवा छिडके। दूसरा तरीका है कि खुले हाथों का प्रयोग किए हुए इसे उखाड़ दें और कहीं गड्ढे में दबा दें या इसे जला दें ।
डा द्विवेदी ने बताया की साधारण नमक का 150 ग्राम 1 लीटर पानी में घोल बनाकर पौधों पर इसका छिड़काव कर इसे समाप्त कर सकते हैं।
डॉ द्विवेदी ने कहा की मिलजुलकर पोलियो का नियंत्रण किया वैसे ही जहां भी देखे, वहां से हटाने का प्रयास करना होगा जिससे धीरे-धीरे इसकी संख्या नगण्य हो जाएगी।गंभीरता को देखते हुए यह संकल्प लिया हम लोग अपने क्षेत्र से इस गाजर घास को हर हाल में समाप्त करना होगा।
