सिवान /बिहार 13 अगस्त।जिला केंद्रीय कन्हैया लाल पुस्तकालय सिवान के सभागार में पुस्तकालय एवम विज्ञान दिवस पर दिनांक 12 अगस्त दिन शनिवार को 2:00 अपराह्न में पुस्तकालय के जनक डॉ शियाली रामामृता रंगनाथन की 132 वी जयंती समारोह का आयोजन किया गया जयंती समारोह की अध्यक्षता पुस्तकालय प्रबंध कारिणी समिति के सदस्य युगल किशोर दुबे ने किया एवं विषय प्रवेश तथा संचालन प्रबंध कारिणी समिति के सदस्य मार्कंडेय दीक्षित ने किया सर्वप्रथम डॉ एस आर रंगनाथन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया गया! अध्यक्षीय भाषण में युगल किशोर दुबे ने डॉक्टर रंगनाथन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म मद्रास में 12 अगस्त 1892 को हुआ था!इनकी प्रारंभिक शिक्षा शियाली के हिंदू स्कूल में तथा स्नातक एवम स्नातकोत्तर की शिक्षा विज्ञान -गणित में गवर्नमेंट कॉलेज क्रिश्चियन कॉलेज मद्रास से की इसके बाद 1917 में गवर्नमेंट कॉलेज मंगलौर में शामिल हुए ।1924 में इन्हें मद्रास विश्वविद्यालय का पहला पुस्तकालय अध्यक्ष पद नियुक्त किया गया। इस पद की योग्यता हासिल करने के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ लंदन गए इसके बाद भारत लौटने पर 1925 से1944 तक मद्रास विश्वविद्यालय 1944 से 1947 तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी 1954 से 1957 तक उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय 1954 से 1957 तक ज्युरिस् स्विट्जरलैंड में शोध और लेखन का कार्य किया। भारत लौटने पर 1959 मे विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में अतिथि प्राध्यापक के रूप में कार्य किया और उसके बाद 1962 बंगलौर मे अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद् स्थापित किया।
जीवन पर्यन्त इससे जुड़े रहे 1961 में गणतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने पुस्तकालय में उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया ।1965 में भारत सरकार ने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में राष्ट्रीय शोध प्राध्यापक राष्ट्रीय पुरस्कार पद्मश्री की उपाधि से पुरस्कृत किया इनके पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियम 1931 पुस्तकालय सेवा के आदर्श एवं निर्णयाक कथन के रूप में स्वीकृत किया है जिसमें कोलन वर्गीकरण एवं क्लासिफाइड कैटलॉग कोड प्रमुख है। मार्कंडेय ने अपने विषय प्रवेश में डॉक्टर रंगनाथन के पुस्तकालय विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हुए कहा की बुद्धिजीवियो एवम लेखकों के ज्ञान प्रवाह से सामाजिक चेतना एवम जागृति का सूत्रपात हुआ! क्रांतिकारी विकास से समाज को नई दिशा मिली। आम अवाम मे ज्ञान के प्रसार का पुस्तकालय ससक्त माध्यम बना! राम नरेश सिंह शिक्षक ने कहा क पुस्तकलाय ज्ञान का सागर होता है जिसमें डुबकी लगाने से अमृत रूपी ज्ञान की प्राप्ति होता है दरोगा प्रसाद राय डिग्री कॉलेज का संस्थापक पुरस्कार डॉ वीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि पुस्तकालय का ही देन है की महा पंडित राहुल सांकृत्यायन और मुंशी प्रेमचंद का को हम जान पाए उदाहरण पेश करते हुए बताया कि विद्यार्थियों के लिए गुणात्मक शिक्षा प्रदान प्रदान करने के लिए पुस्तकालय कंप्यूटर डिवाइस से संपन्न होना चाहिए पुस्तकालय ज्ञान का भंडार होता है उन्होंने बताया कि इंग्लैंड के प्रत्येक गांव में 3-3 पुस्तकालय हैं दरोगा राय डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर उपेंद्रनाथ यादव ने ई लाइब्रेरी एवम डिजिटल लाइब्रेरी की चर्चा करते हुए बताएं कि छात्रों के बीच स्पर्धा प्राप्त करने के लिए पुस्तकालय एक बहुत बड़ा संसाधन है एवं भी एम उच्च विद्यालय इंटर कॉलेज के शिक्षक और एनसीसी ऑफिसर राघव प्रसाद ने पुस्तकालय विज्ञान की महता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान परिवेश में इसकी अनिवार्यता बढ़ गई है भी एम इंटर कॉलेज के शिक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह मुरलीधर मिश्रा और शुभम कुमार सिंह ने पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉक्टर से रंगनाथन के द्वारा किए गए कार्यों के लिए नमन किया उपस्थित सभी सदस्य द्वारा सरकार से आग्रह किया गया के 12 अगस्त को प्रतिवर्ष डॉक्टर एस आर रंगनाथन की जयंती सभी विद्यालयों मे पुस्तकालय दिवस के रूपमें अनिवार्य रूप से मनाने के लिए पत्र निर्गत किया जाए उपस्थित सदस्यों में प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार यादव युगल किशोर दुबे मार्कन्डेय दीक्षित ,प्रोफेसर उपेंद्र यादव, राम नरेश सिंह , राघव प्रसाद धर्मेंद्र कुमार सिंह ,शुभम कुमार सिंह ,मुरलीधर मिश्रा अभिषेक कुमार झा, भोगेंद्र झा ,प्रवीण कुमार अधिवक्ता सुरेंद्र पासवान अंजेश कुमार आदि लोग उपस्थित थे!

