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खंड- खंड में विभक्ति से नही एकजुटता और जनांदोलन से मिलेगी भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता:वक्तागण

RKTV NEWS/अनिल सिंह 10 जुलाई। भोजपुरिया समाज खंड खंड में विभक्त है जिसे लेकर विभिन्न राजनैतिक दल इसका भरपूर फायदा उठा रहे है। आज पूरे देश में कम से कम 5 करोड़ भोजपुरिया मतदाता है और ये जब संगठित होकर की भोजपुरी को आंठवी अनुसूची में शामिल कराना है है का जनांदोलन का रूप धारण कर लेंगे तब भोजपुरी भाषा को आंठवी अनुसूची में शामिल करने से कोई भी शक्ति रोक नही पायेगी उक्त बातें आज लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर आरा के बस पड़ाव स्थित भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर आयोजित “आंठवी अनुसूची में क्यों शामिल नहीं हो रही है भोजपुरी” विषय पर परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कही।
परिचर्चा के पूर्व भिखारी ठाकुर की प्रतिमा सहित मृदंगवादक बाबू ललन जी एवं पदमश्री शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां पर आगंतुकों द्वारा माल्यार्पण किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता माले के नगर सचिव दिलराज प्रीतम व संचालन संस्थापक अध्यक्ष पत्रकार नरेंद्र सिंह ने किया।
भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान आरा के बैनर तले आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए साहित्यकार अजय गुप्ता “अज्ञानी” इंसाफ मंच के राज्य सचिव कयामुद्दीन अंसारी,बड़हरा विधान सभा के पूर्व प्रत्यासी सह जनाधिकार पार्टी के प्रदेश सांस्कृतिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष रघुपति यादव,वार्ड पार्षद रंजीत कुमार सिंह,भाजपा जिला प्रवक्ता राजेश सिंह, डॉ अरविंद राय ,वरिष्ठ रंगकर्मी कृष्णेंदु,मेजर राणा प्रताप सिंह,अमरदीप कुमार जय,जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन संजय कुमार (दिल्ली) आदि ने कहा की जब तक भोजपुरिया समाज एक सशक्त मंच तैयार कर जनांदोलन नही करेगा तब तक भोजपुरी का आठवी अनुसूची में शामिल होने का मामला दिवास्वपन बनकर रहेगा।कई वक्ताओं ने यहां तक कह दिया की आजादी के बाद से ही भोजपुरी की लड़ाई चल रही है।इसलिए सरकार ने 1996 में पाहवा और 2003 में मोहयात्रा आयोग का गठन किया लेकिन फलाफल बेनतीजा रहा। वक्ताओं ने की इसका मुख्य कारण रहा की भोजपुरिया समाज अपनी एक सूत्री मांग को लेकर एक सशक्त जनांदोलन नही चला सका।वक्ताओं ने कहा की देवनागरी हिंदी की अपनी लिपि है ,ठीक है पर 21 भाषाओं को संवैधानिक मान्यता किस आधार पर दिया गया जब एक ही देवनागरी लिपि से लिखी जाने वाली भाषाएं जैसे संस्कृत,मराठी,नेपाली,संथाली,डोगरी, मणिपुरी आदि संवैधानिक मान्यता प्राप्त कर सकती है तो फिर भोजपुरी भाषा क्यों नहीं??
वक्ताओं ने कहा की भोजपुरी भाषा समृद्ध भाषा है जो देश के विभिन्न हिस्सों में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बोली जाती है। मौरीसश और नेपाल में द्वितीय भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है पर जहां की भोजपुरी है वही उपेक्षित है ।ऐसे में लगभग 5 करोड़ मतदाता वाला भोजपुरी समाज जब खंड खंड से अलग हटकर भोजपुरी के सवाल पर अपनी अपनी बात विचारधारा को त्याग कर एक जनांदोलन का रूप दे देंगे उस समय भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हो जायेगा वरना यह भाषा अश्लीलता के बीच फंसकर रह जायेगी।
इस अवसर पर पत्रकार अमरेश सिंह,पत्रकार कमलेश पांडे,व्यास कमलेश पासवान,बाल्मिकी शर्मा,रौशन कुशवाहा,दिनेश मिस्त्री, डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा,शंकर प्रसाद,धनजी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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