चतरा /झारखंड (मामून रशीद) 08जुलाई। नदियों की अस्तित्व बचाने को लेकर चतरा सांसद हुए सक्रिय। मानव जाति पर आने वाले संकट को टालने को लेकर आईआईटी आईएसएम धनबाद के प्रोफेसरों के साथ किया गहन मंथन।कहा सनातन धर्म में मोक्षदायिनी नदी के रूप में विश्व विख्यात निरंजना नदी का अस्तित्व है संकट में।
चतरा सांसद सुनील सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र के सभी सूखी नदियों को फिर से हरा-भरा करने की कवायद शुरू कर दी है। इस बाबत उन्होंने आईआईटी आईएसएम धनबाद के प्रोफेसरों के साथ गहन विचार विमर्श किया। जीवनदायिनी नदियों से अवैध बालू उत्खनन एवं और अवैज्ञानिक तरीके से जगह-जगह की जा रही खुदाई से नदियों का अस्तित्व ही संकट में पड़ता जा रहा है। गौरतलब है कि गया का फल्गु नदी झारखंड में निरंजना नदी के रूप में बहती है। फल्गु नदी का सनातन धर्म में विशेष स्थान है। क्योंकि अपने पूर्वजों के लिए गया के फल्गु नदी में पिंडदान किया जाता है।लेकिन पिछले कुछ वर्षों से अवैज्ञानिक तरीके से बालू खनन के कारण नदियों का अस्तित्व संकट में आ गया है। सांसद ने कहा कि राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण और अवैध बालू खनन पर रोक नहीं लगाया जा रहा है। इसी वजह से नदियों का अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है। सांसद ने कहा कि निरंजना नदी के साथ-साथ दामोदर, म्हाने,बराकर, करमा ,लोहसिंगाना जैसी कई महत्वपूर्ण नदियां चतरा संसदीय क्षेत्र से होकर गुजरती है। लेकिन राज्य सरकार की ढुलमुल नीतियों के कारण नदियों का साफ-सफाई ,रखरखाव नहीं किया जाता है। नदियां मानव जीवन के लिए जीवनदायिनी है। हर हाल में नदियों का अस्तित्व बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को भी आगाह किया की नदियों के संरक्षण,संचालन एवं अवैध उत्खनन रोकने पर कठोर नियम लगाएं। ताकि नदियों का अस्तित्व बच सके और मानव जाति पर आने वाले संकट को टाला जा सके।


