
गीतकार कवि एवं लेखक,वाराणसी(उ.प्र)
बढ़िहैं सबसे यारी..!
छोड़िके नोकरिया पिया, कर खेती- बारी,
बढ़िहैं सबसे यारी ।
गांव,पुर, सार – ससुरारी,
बढ़िहैं सबसे यारी।।
प्राइवेट काम, घर के खर्च ना चलेला,
बंबई से अइले- गइले पांच दिन लगेला।
केहू न सहाय होला आवे जब बिमारी,
बढ़िहैं सबसे यारी ।
गांव,पुर, सार -ससुरारी,
बढ़िहैं सबसे यारी।।1।।
गांव में किसानी अधिया- तिकुड़ी करल जाई,
खाना शुद्ध – सस्ता मिलिहैं , कितनउ मंहगाई।
दुलार करिहैं माई- बाबू नाहीं देइहैं गारी,
बढ़िहैं सबसे यारी।
गांव,पुर, सार- ससुरारी,
बढ़िहैं सबसे यारी ।।2।।
पढ़िके लड़िका -लड़िकी बनिहैं दरोगा- सिपाही,
अंगूठा ना लागी घर में रहिहैं ना सियाही।
फीस लागे कम से कम स्कूल बा सरकारी,
बढ़िहैं सबसे यारी।
गांव, पुर सार – ससुरारी,
बढ़िहैं सबसे यारी।।3।।
धनियां,मर्चा, मुरई, मटर -भंटा में कमाई,
गेहूं, धान, मक्का, बजरा – ज्वार बोवल जाई।
बिजुली -पानी के नाहीं बा आज मारा- मारी,
बढ़िहैं सबसे यारी।
गांव, पुर, सार – ससुरारी,
बढ़िहैं सबसे यारी।।4।।
गांव के विकास पर सरकार ध्यान दिहले,
सड़क,नाली बनले शुद्ध पानी मिलइ लगले।
बदले “नरेश” जिनगी घूमब मोतिहारी,
बढ़िहैं सबसे यारी ।
गांव, पुर, सार- ससुरारी
बढ़िहैं सबसे यारी।।5।।


