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पटना:बिहार में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मिलेगी नई गति, एसपीडीआरआर-बिहार का शुभारंभ।

समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण(एनपी-सीबीडीआरआर) के माध्यम से गाँवों एवं टोलों के स्तर पर समुदाय बनेगा सशक्त

RKTV NEWS/पटना(बिहार)08 सितंबर। बिहार में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को संस्थागत एवं समुदाय-केंद्रित स्वरूप देने की दिशा में आज बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा यूनीसेफ, बिहार के सहयोग से स्टेट प्लेटफॉर्म फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (एस.पी.डी.आर.आर.) का शुभारंभ एवं नेशनल प्रोजेक्ट फॉर स्ट्रेंथनिंग कम्युनिटी-बेस्ड डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (एन.पी.-सी.बी.डी.आर.आर.) के लिए रणनीति निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई।

इस अवसर पर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकान्त, सदस्य पी.एन. राय, नरेंद्र कुमार सिंह, प्रकाश कुमार, शंभूदत्त झा, प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान उपस्थित थे। कार्यक्रम में यूनीसेफ बिहार की सी.एफ.ओ. मोनिका नेल्सन, एन.डी.एम.ए. की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. स्वेता बैद्य, बिहार मौसम सेवा केंद्र के निदेशक सी.एन. प्रभु, विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों सहित प्राधिकरण के अधिकारी एवं जिलों से आए पंचायती राज पदाधिकारी, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, पंचायत प्रतिनिधियों, यूनीसेफ के राजीव कुमार, वीरेंद्र पांडे एवं हितभागी संस्था के विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर प्राधिकरण के माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत ने अपने संबोधन में कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण की पूरी प्रक्रिया का केंद्र आम नागरिक और समुदाय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित लोगों की वास्तविक जरूरतों को समझे बिना बनाई गई रणनीतियाँ प्रभावी नहीं हो सकतीं। उन्होंने समुदाय, स्थानीय संस्थाओं और सरकार के बीच बेहतर संवाद तथा जनभागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने बिहार में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता रेखांकित की।

प्राधिकरण के सदस्य पी.एन. राय ने कहा कि आपदा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था के लिए पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त करना और विकास योजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने एस.पी.डी.आर.आर. को राज्य के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी हितधारकों को एक साझा मंच पर लाने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने आपदा प्रबंधन में नई तकनीक एवं नवाचार के उपयोग तथा चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा एवं उनमें सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में प्राधिकरण सचिव मो. वारिस खान ने कहा कि बिहार बाढ़, वज्रपात, लू, शीतलहर सहित विभिन्न प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के प्रति संवेदनशील है। ऐसे में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण आधार समुदाय की क्षमता एवं तैयारी को मजबूत करना होना चाहिए। आपदा के समय स्थानीय समुदाय ही प्रथम प्रतिक्रिया देता है, इसलिए समुदायों को प्रशिक्षित एवं सक्षम बनाकर जन-धन की क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यूनीसेफ बिहार की सी.एफ.ओ. सुश्री मोनिका नेल्सन ने कहा कि आपदाओं का प्रभाव बच्चों, महिलाओं और अन्य संवेदनशील समूहों पर अधिक पड़ता है। इसलिए समुदाय की लचीलापन क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने बिहार में एसपीडीआरआर के शुभारंभ को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए विभिन्न विभागों, पंचायती राज संस्थाओं और समुदायों के समन्वित प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया।

एन.डी.एम.ए. की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. स्वेता बैद्य ने एन.पी.-सी.बी.डी.आर.आर. की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस राष्ट्रीय परियोजना के तहत बिहार के 5 जिलों सीतामढ़ी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी और सुपौल की 100 ग्राम पंचायतों में समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मजबूत किया जाएगा। परियोजना में ग्राम पंचायतों को आपदा-रोधी एवं सक्षम बनाने, विकास योजनाओं में डी.आर.आर. के एकीकरण तथा स्थानीय स्तर पर जोखिम-विशिष्ट न्यूनीकरण उपायों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कार्यशाला में बाढ़ की पूर्व चेतावनी एवं निगरानी, भूकंपरोधी निर्माण एवं रेट्रोफिटिंग तथा जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी परिस्थितियों जैसे विषयों पर तकनीकी प्रस्तुतियाँ भी दी गईं।
कार्यक्रम में एस.पी.डी.आर.आर. के शुभारंभ के साथ बिहार में डी.आर.आर. के लिए सैटेलाइट प्लेटफॉर्म, बिहार के संदर्भ में सी.बी.-डी.आर.आर. तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किए गए। इसके बाद तकनीकी सत्र-1 में सीबीडीआरआर एवं जोखिम शासन के संस्थागतकरण, समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा ग्राम पंचायत आपदा प्रबंधन योजनाओं के साथ इसके एकीकरण पर चर्चा हुई।
तकनीकी सत्र-2 में बाढ़ की पूर्व चेतावनी एवं निगरानी, भूकंपरोधी निर्माण एवं मौजूदा भवनों के सुदृढ़ीकरण/रेट्रोफिटिंग तथा बिहार के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन एवं चरम मौसम की परिस्थितियों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
तकनीकी सत्र-3 में स्वयंसेवा, सामाजिक समावेशन एवं क्षमता निर्माण पर चर्चा की गई। इसके पश्चात समूह गतिविधि एवं चर्चा के माध्यम से राष्ट्रीय सीबीडीआरआर परियोजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने, डीआरआर को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में मुख्यधारा में शामिल करने, उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के उपयोग तथा पंचायतों के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया।
अंत में समूहों द्वारा निष्कर्ष एवं अनुशंसाओं का प्रस्तुतीकरण, खुली चर्चा एवं प्रश्नोत्तर, वैलिडेटरी सत्र तथा आगे की कार्ययोजना पर विचार किया गया। बीएसडीएमए के ओएसडी मो. मोज़उद्दीन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम के समापन पर यह संकल्प व्यक्त किया गया कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण को केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित न रखते हुए ग्राम पंचायत स्तर की विकास प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि सुरक्षित, सक्षम और आपदा-लचीला बिहार तैयार किया जा सके। विशेष रूप से समुदाय को प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में सक्षम बनाने और “अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति” तक सुरक्षा एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण का संदेश पहुँचाने पर जोर दिया गया।

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