हिन्दी पखवारा के अंतर्गत साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवयित्री सम्मेलन।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)08 सितम्बर। मंगलवार का दिन साहित्य सम्मेलन के लिए सतरंगी छटाओं से सुंदर, मंगल और मुग्धकारी रहा। आज स्त्री-मन के अनेक गाँठ खुले और गीत-ग़ज़लों में व्यक्त हुए। विविध रूपों और उनके संवेगों को अभिव्यक्ति देने वाली विभिन्न भावों की कविताओं और गीत-ग़ज़लों से साहित्य सम्मेलन का ऐतिहासिक सभागार देर संध्या तक झूमता-मचलता रहा। अवसर था हिन्दी पखवारा के अंतर्गत आयोजित कवयित्री सम्मेलन का। वरिष्ठ कवयित्री किरण सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस इस शानदार कवयित्री-सम्मेलन में ३६ से अधिक कवयित्रियों ने अपने भावों को संगीतात्मक अभिव्यक्ति दी।
काव्य-पाठ का आरंभ चंदा मिश्र ने वाणी-वंदना से किया। सुप्रसिद्ध सुकंठी कवयित्री आराधना प्रसाद ने भारतीय गृहणियों की पीड़ा को इन पंक्तियों में अभिव्यक्ति दी- “ओ औरत है जो विना तनखाह के मज़दूरी करती है/ सुबह से रात तक जो आग की भट्ठी में तपती है”।
शायरा ज़ीनत शेख़ ने कहा- “अब मेरी ग़ज़लें रंग लायी हैं/ मैंने कुछ शोहरतें कमायी हैं/ कोई बादल यहाँ बरसता नहीं/ यो तो हर सु घटाएँ छायी हैं”। डा पुष्पा जमुआर कहना था कि- “बहुत सरल है नारी पर कथा लिखना/ ओ कवि कथा लिखो’। पूनम कतरियार ने स्त्रियों पर प्रश्न करनेवाले पुरुषों से सवाल करती है- “पत्नी के सतीत्व को ललकारने वाले/ राजा राम पुरुष दंभ को पालने वाले/ शंकालु पुरुष के मन की बतकही है/ प्रजा के बहाने तुमने मन की कही है।”
वरिष्ठ कवयित्री पूनम आनंद, विभा रानी श्रीवास्तव, डा पुष्पा जमुआर, सागरिका राय, डा पूनम देवा, डा सुमेधा पाठक, सागरिका राय, शमा कौसर ‘शमा’, डा रेणु मिश्र, डा विद्या चौधरी, डा सुधा सिन्हा, डा नीतू सिंह, ज्योति पाठाक, अनुभा गुप्ता, यशोदा शर्मा, पूनम कतरियार, मीरा श्रीवास्तव, सुजाता मिश्र, डा कुमारी अनु, राज प्रिया रानी, मधुरानी लाल, डा सुधा सिन्हा, नीता सहाय, सुधा पाण्डेय, मीरा श्रीवास्तव, डा शमा नासनीन नाजां, डा प्रतिभा रानी, प्रेमलता सिंह, ज़ीनत शेख़, डा अणिमा श्रीवास्तव, ज्योति पास्कल, सुनीता रंजन, तनुजा विनीता शर्मा, डा सिंधु कुमारी, डा मीना पाण्डेय, सांगीता मिश्र, प्रियंका श्रीवास्तव, एकता शाही, प्रियंका श्रीवास्तव ‘शुभ्र’, रंजना कुमारी, राज प्रिया रानी, तनुजा सिन्हा, आद्याश्री, पुनीता श्रीवास्तव, निशा पाराशर आदि ने भी अपनी रचनाओं से कवयित्री-सम्मेलन को यादगार बना दिया। मंच का संचालन डा आशा रघुदेव ने किया।
श्रोताओं में सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ, डा कुमार अरुणोदय, कुमार अनुपम, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, शुभचंद्र सिन्हा, इंदु भूषण सहाय, प्रवीर पंकज, कृष्ण रंजन सिंह, ईं बाँके बिहारी साव, कमल नयन श्रीवास्तव, भास्कर त्रिपाठी आदि बड़ी संख्या में सुधी श्रोता और साहित्यकार उपस्थित थे।

