
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)09 अगस्त।श्रावण-समाराधना के क्रम में श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् एवं सनातन-सुरसरि सेवा न्यास के संयुक्त तत्वावधान में कतिरा स्थित श्री सहदेव गिरि मंदिर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीशिवमहापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य (डॉ.) भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि समस्त दुःखों का मूल पाप है। पाप कर्मों के कारण जीव को विभिन्न प्रकार की यातनाएं भोगनी पड़ती हैं, जबकि पुण्यात्मा को दिव्य सुखों की प्राप्ति होती है।आचार्य भारतभूषण ने परस्त्रीगमन, परधन हरण, परनिंदा, चुगली, अभक्ष्य भोजन, मदिरापान, हिंसा, असत्य भाषण तथा ज्येष्ठ-श्रेष्ठ, तपस्वियों, माता-पिता और गुरु आदि के साथ दुर्व्यवहार को गंभीर पाप बताते हुए कहा कि ऐसे कर्म मनुष्य को दुखद परिणामों की ओर ले जाते हैं।उन्होंने कहा कि गोग्रास, श्वान-काकादि के लिए अन्नदान, देवता एवं अतिथि सेवा, शिव आराधना तथा व्रत आदि धार्मिक आचरण के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को सद्कर्मों से जोड़ सकता है।आचार्य ने कहा कि मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है। इसलिए मनुष्य को मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहते हुए सत्कर्म, सेवा, साधना एवं शिवोपासना के मार्ग पर चलना चाहिए। कथा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
