भोपाल/मध्यप्रदेश 30 जून।भोपाल मध्यप्रदेश तुलसी साहित्य अकादमी के तत्वावधान में तुलसी मानस प्रतिष्ठान, भोपाल के कार्यकारी अध्यक्ष रघुनन्दन शर्मा की अध्यक्षता, डॉ.राजेश श्रीवास्तव, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण भोपाल के मुख्य आतिथ्य और डॉ. मोहन तिवारी आनंद के सारस्वत आतिथ्य में विपुल श्रीवास्तव ‘विप्लव’ की पुस्तक “आदियोगी नीलकंठ” का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम का सरस एवम सफल संचालन साहित्यकार गोकुल सोनी ने किया
अध्यक्षता कर रहे पूर्व सांसद रघुनन्दन शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि विपुल जी की इस पुस्तक में भगवान शिव के बारे में विपुल सामग्री है। मैं इस पुस्तक को पढ़कर जान पाया कि शिव क्या हैं। इसे पढ़ने के बाद शिव पुराण को पढ़ने की आवश्यकता नहीं रह जातीं। पुस्तक गद्य और पद्य दोनों में सुन्दर प्रस्तुति है।
डॉ.राजेश श्रीवास्तव ने शिव के विभिन्न स्वरूपों और अर्ध शिवलिंग की विस्तृत विवेचना करके उपस्थित साहित्य रसिकों को प्रसन्न कर दिया।
भोपाल के प्रबुद्ध लेखक सुरेश पटवा ने भारतीय ज्ञान परम्परा में शिव की अवधारणा का सांगोपाँग विवेचना प्रस्तुत करते हुए बताया कि कैसे ज्योति स्वरूप शिव शिवलिंग और फिर शंकर-पार्वती में मान्य हुए। हिंदू धर्म में श्रद्धा का आधार आस्था और तर्क है। केवल आस्था से श्रद्धा टिक नहीं पाती है।
डॉ. मोहन तिवारी आनंद ने उपस्थित साहित्यकारों का स्वागत किया। उन्होंने लेखक विपुल और उनकी पुस्तक की भूरि-भूरि प्रशंसा की। पुस्तक के लेखक विपुल श्रीवास्तव ‘विप्लव’ ने पुस्तक की विषय वस्तु ओर प्रकाश डाला कि आशुतोष महादेव शिव पर केंद्रित अनोखी पुस्तक “आदियोगी नीलकंठ” आपको द्वादश ज्योतिर्लिंग और शिव की उन्नीस अंश अवतारों की मानसिक यात्रा करा कर चौदह सरस कविताओं के बाग की सैर कराती है। सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव ने उपस्थित साहित्यकारों का आभार प्रदर्शन किया।

