
RKTV NEWS/दुमका (झारखंड)08 मई।दुमका जिले में स्वयं सहायता समूह (SHG) एवं फूलो-झानो आशीर्वाद योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। जिले के कुल 102 पंचायतों में अब तक 287 महिला सदस्यों ने टोटो (ई-रिक्शा) खरीदकर सम्मानजनक एवं स्थायी आजीविका अपनाई है। यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनी है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की भी मिसाल बन रही है।
इसी परिवर्तन की प्रेरणादायक कहानी हैं शिकारीपाड़ा प्रखंड की सारा हांसदा एवं मीनू हेंब्रम।
संघर्ष से सम्मानजनक जीवन तक
शिकारीपाड़ा प्रखंड अंतर्गत बालीजोर गांव की सारा हांसदा कभी अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए हड़िया-दारू बेचने को मजबूर थीं। आय अनियमित थी और सामाजिक रूप से यह कार्य भी उपयुक्त नहीं माना जाता था। इसी दौरान असंतुलित जीवनशैली एवं कठिन परिस्थितियों के कारण वे टीबी जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो गईं। लगभग छह महीने तक बीमार रहने से परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई।
इस कठिन समय में “राज बहा महिला मंडल” स्वयं सहायता समूह उनके लिए सहारा बना। वर्ष 2018 में उन्होंने चप्पल निर्माण कार्य से जुड़कर नई शुरुआत की, जिससे उन्हें प्रतिदिन ₹200-300 तक की आय होने लगी।
इसी बीच उन्हें टोटो गाड़ी चलाने की जानकारी मिली। समूह के माध्यम से बैंक से तीसरे लिंकेज के तहत ₹1.40 लाख का ऋण प्राप्त कर उन्होंने ई-रिक्शा खरीदा। आज सारा प्रतिदिन ₹600-800 तक की आय अर्जित कर रही हैं। अब उनका परिवार आर्थिक रूप से पहले से अधिक मजबूत हुआ है और वे आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।
योजना से बदली जिंदगी
पलासी पंचायत के योगीखोप गांव की मीनू हेंब्रम की कहानी भी प्रेरणादायक है। कभी उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझता था और जीविकोपार्जन के लिए हड़िया-दारू बेचने का सहारा लेना पड़ता था।
वर्ष 2008 में “जियोन झरना महिला मंडल” से जुड़ने के बाद उन्हें फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के तहत ₹10,000 का ब्याज मुक्त ऋण मिला। बाद में उन्हें ₹50,000 एवं ₹1 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया गया। इस सहायता से उन्होंने टोटो गाड़ी खरीदी, जिसे उनके पति चलाने लगे।
आज उनके परिवार की दैनिक आय ₹800-1000 तक पहुंच गई है। अब परिवार को रोजमर्रा के खर्च के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। वे अपने दोनों बच्चों को अच्छे विद्यालय में पढ़ा रही हैं और सम्मानजनक जीवन यापन कर रही हैं।
मीनू हेंब्रम वर्तमान में JSLPS में नवजीवन सखी के रूप में कार्यरत हैं तथा अन्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
सारा हांसदा एवं मीनू हेंब्रम की कहानियां यह साबित करती हैं कि सही मार्गदर्शन, समूह सहयोग एवं सरकारी योजनाओं की मदद से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं, बल्कि सामाजिक सम्मान भी प्राप्त कर सकती हैं।
आज दुमका जिले में सैकड़ों महिलाएं टोटो गाड़ी के माध्यम से सम्मानजनक आजीविका अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं।
