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बिहार में लॉन्च होगी ‘गंगा प्रहरी आपदा मित्र योजना’ : डूबने की घटनाओं पर रोक के लिए बड़ा कदम।

बिहार ने आपदा प्रबंधन को राहत से आगे बढ़ाकर तैयारी, तकनीक और सामुदायिक भागीदारी का मॉडल बनाया: NDMA के साथ उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तुत रोडमैप

RKTV NEWS/पटना(बिहार )04 मई। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभागार में आज उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव मनीष भारद्वाज, प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान, जिलाधिकारी वैशाली वर्षा सिंह, नगर आयुक्त, पटना नगर निगम यशपाल मीणा, आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव मो. नदीमुल ग़फ़्फ़ार सिद्दीकी, एनडीएमए सलाहकार लेफ्टिनेंट कर्नल संजीव कुमार शाही, एवं कर्नल कृति प्रताप सिंह, प्रोजेक्ट स्पेशलिस्ट शिखा शर्मा, डॉ. मोना चौहान सहित एसडीआरएफ़ समादेष्टा राजेश कुमार एवं प्राधिकरण के विशेष कार्य पदाधिकारी मो. मो. मोइज़ उद्दीन समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान बिहार में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, उपलब्धियों एवं भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। बैठक में बताया गया कि बिहार की आपदा प्रबंधन रणनीति अब पूर्व-तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण, जन-जागरूकता, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक क्षमता निर्माण के एक समग्र मॉडल के रूप में “राहत-केन्द्रित रणनीति” से आगे बढ़कर “तैयारी-केन्द्रित” हो चुकी है। राज्य स्तर से लेकर पंचायत एवं गांव स्तर तक त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा जनहानि में कमी सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ तंत्र विकसित किए गए हैं। इस अवसर पर आपदा जागरूकता पार्क एवं प्रशिक्षण केंद्रों के विकास, सुरक्षित ग्राम अवधारणा, नदी-तटीय क्षेत्रों में सामुदायिक प्रशिक्षण, तथा स्थानीय युवाओं, महिलाओं एवं स्वयंसेवकों को सीपीआर, फर्स्ट एड और रेस्क्यू तकनीकों में प्रशिक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव मनीष भारद्वाज ने जानकारी दी कि बिहार में डूबने की घटनाओं को कम करने के लिए गंगा प्रहरी आपदा मित्र योजना बिहार में लॉन्च की जाएगी। इस योजना के तहत गंगा एवं अन्य नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को डूबने से बचाव के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा तथा स्थानीय युवाओं को तैराकी, गोताखोरी और जीवन रक्षा तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उद्देश्य यह है कि स्थानीय स्तर पर ही प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो, जो आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देकर लोगों की जान बचा सके।
राज्य में आपदा मित्र, जीविका दीदियाँ, शिक्षक, छात्र एवं अन्य समुदाय आधारित समूहों को जोड़कर एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क तैयार किया गया है। विद्यालयों में नियमित मॉक ड्रिल, सुरक्षा शिक्षा एवं व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को आपदा के समय सुरक्षित रहने और दूसरों की सहायता करने के लिए सक्षम बनाया जा रहा है।
तकनीकी क्षेत्र में राज्य द्वारा मौसम पूर्वानुमान, बाढ़ चेतावनी एवं सूचना प्रसार के लिए एकीकृत प्रणाली विकसित की जा रही है। इस दिशा में ISRO, IIT, IISc और TCS जैसे संस्थानों के साथ सहयोग किया जा रहा है। डेटा आधारित निर्णय, मोबाइल अलर्ट और मशीन लर्निंग आधारित समाधान पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
बैठक में साइबर सुरक्षा, महिला एवं बाल सुरक्षा, नाव संचालन सुरक्षा तथा आपदा के समय विश्वसनीय सूचना प्रसार जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
प्राधिकरण ने यह भी रेखांकित किया कि बिहार में आपदा प्रबंधन को केवल सरकारी तंत्र तक सीमित न रखकर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन एवं समुदाय के साझा प्रयास के रूप में विकसित किया जा रहा है।
बैठक में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की वर्तमान संगठनात्मक संरचना, संचालन क्षमता एवं आपदा के प्रति तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बढ़ते आपदा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए एसडीआरएफ को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक उपायों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान SDRF की संगठनात्मक संरचना एवं तैनाती की समीक्षा, बाढ़ के दौरान प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए नाविक स्वयंसेवकों के क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण, राज्यभर में घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (IRS) के अधिसूचना एवं प्रभावी क्रियान्वयन की स्थिति, आपदा पूर्व चेतावनी के प्रसार हेतु “सचेत ऐप” के व्यापक उपयोग तथा इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (IDRN) के प्रभावी उपयोग एवं अद्यतन बनाए रखने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए।
प्राधिकरण उपाध्यक्ष उदय कांत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक सक्षम, त्वरित एवं प्रभावी बनाने के लिए समन्वित प्रयास सुनिश्चित किए जाएं।
बैठक में परिचर्चा का मुख्य केंद्र बिहार में विकसित किए जा रहे आपदा प्रबंधन मॉडल को न केवल राज्य के लिए, बल्कि देश के लिए भी एक उपयोगी उदाहरण बन सकता है। राज्य का लक्ष्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जो आपदा आने पर केवल प्रतिक्रिया न दे, बल्कि पहले से तैयार रहे और सामूहिक रूप से सुरक्षा सुनिश्चित करे।

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