आर.एम.एस. (रेल डाक सेवा)
लोग पूछते क्या बतलाऊँ, किसे बताऊँ अपना डेरा; यहाँ तो हर दिन लगा हुआ है, आवक और जावक का फेरा।
घर में सेट, बाहर में सेट, यहाँ तो है हर काम में सेट; दिन वाले का रात से और रात वालों का दिन से, दैव योग से होता भेंट।
इतने पर भी चैन न इनको, सेट बचा बैचों के बीच; संग्रह जितना करे डाकघर, छंटनी होती इनके बीच ।
मयहर-पियहर बीच चले, डोली में वै ही जस गोरी; ले कहरा दौड़े डोली को, बदलत काँध बीच थोरा-थोरी।
आर० एम० एस० वैसे पहुँचावे, सजनी को सजना के घर;छाँट-छाँट करके पहुँचावे, हर दुलहिन को पाल पियाघर ।
लगे न टोटका, नजर लगे ना, हैं, मेटल टोकन साथ में रखते; काली कोट टी० टी०, टी० सी० बस, उसे देखकर दूर भागते ।
मोहर, सील, कागज पेंसिल को, रखते हैं थैले में पास; दुलहिन का श्रृंगार बक्स सा, रखते हैं पोर्ट फोलियो पास।
और रिपोर्ट रोजनामचा दैनिक का, लिखते जाते कामों काम; पुनः उसे हर शाम पठाते, बस एच० आर० ओ० के नाम ।
लागू करना, रद्द करना या मार्ग बदल, इन आदेशों को कहते हैं ए० बी० सी० डी० यदि अति विशिष्ट कोई आनेवाला हो, तो इनके आदेशों के पहले लग जाती है टी० बी० ।
ये तो हर नाम रखेंगे ईंगलिश में, चाहे बात भले हो हिन्दी में; अल्फावेट में नाम रहेगा, नम्बर लगा रहेगा बच्चों में।
चिट्ठी को कबुतर समझ,बहत्तर दरबों में घुसा देते हैं; फिर थैलों में कर बंद, गाड़ी में चढ़ा देते हैं, और डाकघर को जब दे देते हैं, तो वे उन्हें बाँट कर उड़ा देते हैं।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की छियालसवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

