
राम जन्म कथा
राम जी जनमले कइसे, मिली आज गायीं जा; मुनी बाल्मीकि कहले, उहे आज गायी जा ।
कौसल के राजा, दशरथ रहन गायीं जा; एक नाहीं तीन रानी, उनके रहीं गायी जा।
अवध नगरीया उदास, काहे गायीं जा; काहे न ललन उनको, इहे आज गायीं जा।
गुरू हो वशिष्ट मुनी, रउवा कुछ बतायीं ना; हरी ना उदासी रउवा, आज कुछ बतायी ना।
गोदी में बालक आवे, कुछ सुझवा बतायी ना; करवो उपाय उहो, अब तो बतायीं ना।
काहे के उदासी राजा, श्रृंगी ऋषि के बुलायी ना; पुत्र के यज्ञ उनके, हाथ ही करायी ना।
बेदी आ बना के ओह में, हवन करायी ना; वो ही फले रउवा आपन, वंशवा बढ़ायी ना।
होखे लागल यज्ञ, अब आगे हाल देखींना; यज्ञ के आहुति बीच, यज्ञ मानुस देखी ना।
हाथ में कटोरा खीर, खड़ा उनको देखीं ना; बोले बोली खीर ले ली, राजा उनके सुनी ना।
कुंडवा के खीर राजा, महल में भेजायीं ना; तीनहुँ त रानीयन के, खीर त खिलायी ना।
चले के कटोरा लेकर, राजा जब खड़ा भइले; चीलवाँ झपाटा मारी भरी ठोर भाग गइले ।
पवन के झोंका पायी, ठोर खीर गिर गइले; पायीं के अंजनी माता, मन में मुदित भइली ।
एही विधि अंजनी कुमार, पवन सुत पैदा भइले, खीर ही के नाता से त, राम से इ जुड़ गइले ।
पहुँचल कटरो खीर, आधा त कौश्लिया खइली; ओही आधा सुनी अब, मंझली सुमित्रा खइली ।
आधा ही के आधा में से, आधा ही कैकयी खड़ली; बाकी साकी फिर से, सुमित्रा सब खायी गइली ।
तीनों रानी खाते खीर, गरभे में मात गइलीं; जैसे-जैसे खीर खइली, गोदी में ललन पइली,
रामजी कौश्लिया कोंखे, कैकयी से भरत भइले; मझली सुमित्रा से, लखन-शत्रध्न भइले ।
अवध अँगनवा में, चारगो ललन भइले; दशरथ के घर आज, खुशी ही से भर गइले ।
देवी-देव देखी-देखी, आज सब खुश भइले; ब्रह्मा के बात दिहल, देव सब बुझ गइले ।
झुम उठल धरती, आकाश, आज खील गइले; रावण के नाश लागी, राम अवतार भइले ।
रामजी जनमले कइसे, मिली आज गायी जा;
मुनी बाल्मीकि कहले, उहे आज गायीं जा।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की उनचालीसवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)
