आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 26जून। आज इफको पटना एवं भोजपुर कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में के द्वारा सहकारी कार्मिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र आरा में आयोजित किया गया। जिसमे जिले के पैक्स के अध्यक्ष, बिस्कोमान के प्रभारी, कृषक सेवा केंद्र के प्रभारी के साथ प्रगतिशील कृषक एवं उर्वरक विक्रेता मौजूद रहें।
कार्यक्रम में इफको के उपमहाप्रबंधक श्री वाई पी सिंह ने सहकारी समितियों और इफको के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जानकारी दी कि आज के समय में 2 लाख करोड रुपए से ज्यादा की अनुदान की व्यवस्था प्रतिवर्ष भारत सरकार कर रही है ।
इफको पटना के उपमहाप्रबंधक कुमार सुरेंद्र सिंह ने आग्रह किया की मिट्टी की उर्वरकता बचाए रखने के लिए इफको नैनो यूरिया, नैनो डी ए पी का इस्तेमाल करे , नैनो डीएपी का उपयोग 250 मिलीलीटर प्रति एकड़ बिचड़ा उपचार में प्रयोग करना ज्यादा फायदेमंद है। अगले बर्ष से नई पाॅस मशीन आ रही है जिसमे खेत के आँकडे के आधार पर उर्वरक की आपूर्ति होगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं हेड डा पी के द्विवेदी ने संतुलित उर्वरक के प्रयोग जानकारी देते हुए सुझाव दिया कि अपने खेतों में कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक ,बोरन के साथ जरूरत पर हरी खाद के रूप मे ढैंचा का प्रयोग बेहतर प्रदर्शन के लिए आवश्यक होगा। डॉक्टर द्विवेदी ने बताया कि धान की खेती में कम से कम एक किलो धान पैदा करने में दो हजार से ज्यादा लीटर पानी की जरूरत है। वैकल्पिक कृषि के रूप में मक्का श्रीअन्न, जैसे बाजरा, ज्वार, रागी, चीना के अतिरिक्त बागवानी, फलदार पौधो के साथ पशुपालन के लिए चारा की पैदावार बढ़ाना होगा। इस अवसर पर किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सही तरीके से प्रयोग करने पर नैनो यूरिया से उन्हें बहुत बेहतर परिणाम मिले हैं।
इफको के क्षेत्र प्रबंधक अभय मिश्र ने सबका धन्यवाद दे कर कार्यक्रम का समापन किया।

