
RKTV NEWS/गढ़वा(झारखंड)21 मार्च।प्रकृति, परंपरा और सामुदायिक एकता के प्रतीक सरहुल पर्व के अवसर पर गढ़वा समाहरणालय सभागार में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी दिनेश यादव की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में जिला कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश सहित कल्याण विभाग के सभी कर्मी उपस्थित रही।
“सरहुल” पर्व, जिसका अर्थ मुंडारी भाषा में “साल वृक्ष का त्योहार” है, झारखंड की प्रमुख आदिवासी समुदायों की आस्था और प्रकृति के प्रति उनके गहरे संबंध को दर्शाता है। इस अवसर पर साल वृक्ष की पूजा-अर्चना की जाती है तथा ग्राम देवताओं को फूल एवं अन्न अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं अच्छी फसल की कामना की जाती है।
गढ़वा जिले में अनुसूचित जनजाति एवं आदिम जनजाति समुदाय की महत्वपूर्ण उपस्थिति है। जिले के लगभग 900 ग्रामों में से करीब 600 ग्रामों में अनुसूचित जनजाति तथा 195 ग्रामों में आदिम जनजाति समुदाय निवास करते हैं, जिनकी अधिकता बरगड़, भंडरिया, चिनिया, रंका एवं रमकंडा प्रखंडों में है। यह समुदाय जिले की कुल जनसंख्या का लगभग 15 प्रतिशत है और अपनी परंपराओं एवं प्रकृति संरक्षण के माध्यम से क्षेत्र की पहचान को सशक्त करता है।
इस अवसर पर उपायुक्त श्री यादव द्वारा प्रकृति उपासक आदिवासी भाइयों के बीच पूजन सामग्री का वितरण किया गया। उन्होंने अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रति जिला प्रशासन की ओर से गहरा सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि इनके योगदान से झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, परंपराएं एवं वन सुरक्षित हैं और राज्य की पहचान देशभर में स्थापित हो रही है।
उन्होंने समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए आभार प्रकट करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अनुसूचित जनजाति समुदाय के सभी परिवारों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है।
सरहुल पर्व का यह आयोजन न केवल प्रकृति की आराधना का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक एकता का भी सशक्त संदेश देता है।

