
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)21 मार्च।जगदेव नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के चौथे दिन शुक्रवार को प्रवचन करते हुए श्रीमत्सनातनशक्तिपीठाध्यक्ष आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने पूरी तरह से अधार्मिक अराजकता का सूत्रपात कर दिया था।अनीति का साम्राज्य स्थापित हो गया था तब उसके पुत्र प्रह्लाद जी ने दृढ़तापूर्वक संघर्ष किया और शास्त्रीय शासन की पुनर्प्रतिष्ठा की।प्रह्लाद जी ने बचपन से ही शास्त्रीय धर्म का आलंबन लिया।देवर्षि नारद के उपदेशों का उनके हृदय पर गहरा प्रभाव पड़ा। पिता के साथ शिष्टाचार और सौहार्द का पूर्ण पालन करते हुए उन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया जिसके परिणामस्वरूप भगवान ने नृसिंहावतार लिया और असुर-अराजक तत्त्वों का सफाया कर शास्त्रीय शासन का मार्ग प्रशस्त किया।प्रह्लाद जी भक्तों में शिरोमणि बने। आचार्य ने गजेंद्र मोक्ष की कथा कहते हुए कहा कि जीव को भवसागर में काल ही ग्राह बनकर पकड़ता है।सारे सगे-संबंधी लाचार और मूकदर्शक बन जाते हैं।उस समय एकमात्र भगवान की शरणागति और स्मृति ही हमारी नौका बनती है।आचार्य ने कहा कि ग्राह और गजेंद्र दोनों ही ने ब्राह्मण का अपराध किया था किंतु ब्राह्मण का शाप भी परम वरदान सिद्ध हो भगवत्प्राप्ति का साधन बना। दोनों की मुक्ति हुई। आज समुद्र मंथन, देवासुर संग्राम, वामनावतार, मत्स्यावतार, परशुरामावतार,श्रीरामावतार तथा श्रीकृष्णावतार की कथायें संपन्न हुईं। अंत में नंदोत्सव का भव्य आयोजन हुआ।

