गाँधी विचार
बाहर का कोई चीज न खरीदें, किसकी अजव मनोती है;
मैनचेस्टर में लगी आग तब,
कैसी गजब कसौटी है।
चरखा कातकर खद्दर पहीने,
देह पर तभी लँगोटी हो,
जन-जन को जब मिले न धोती, उससे अच्छी लँगोटी है।
यह कैसा अभियान चलाये,
गाँवों के गाँव जगा के;
पूरे देश को दण्डी पहुँचाये,
आगे-आगे जाके ।
अर्थ तंत्र को दिशा दिखाये,
अपना नमक बना के;
रहे फिरंगी बचे न देश में,
दम लिया, उन्हें भगा के।
बन्द किये मुँह, आँखें, कानों को,
वे है क्या सिखलाते;
बुरा न बोलो, बुरा न देखो, बुरी बात न सुनना,
होगा स्वच्छ चरित्र, बस वे हैं हमें बताते ।
साबरमती के सन्त,
ये कैसा प्रयोग करते हो; सत्य-अहींसा सबका निदान है, हरदम उपयोग इसे करते हो।
चाहे नेटाल हो, चाहे चम्पारण,
चाहे जालियाँवाला हो;
सत्य-अहिंसा के अंदर में,
देखा ईश्वर अल्लाह है।
स्वदेशी अपना लो भैया,
मिल बाँटकर खा लो;
रघुपति राघव तेरा नाम, ईश्वर अल्लाह गा लो।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की सातवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

