तिरंगा झंडा
हे मेरे प्रतीक राष्ट्र के,
तुमको हे ध्वज, नमन करूँ मैं;
लहराओ उन्मुक्त गगन में,
जग में तुमको लिये बढूँ मैं।
अति बलिदान चुकाया मैंने,
तब तुमको, मैंने है पाया;
बलि का भगवा, सर पर बाँधे,
धवल हृदय से, शान्ति को पाया।
इसीलिए हे ध्वज, शान्ति को
अपने बीच बुलाया
राष्ट्र निरंतर बढ़े प्रगति पथ
रथ का चक्र बढ़ाया ।
त्याग शांति का चक्र बढ़ा तो,
हरा-भरा धन वैभव छाया;
हे मेरे प्रतीक राष्ट्र के
तुमको हे ध्वज नमन करूँ मैं।

( उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की दूसरी रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395, पूर्व में प्रकाशित रचना की लिंक https://rktvnews.com/news/162305)

