‘भारतीय भाषा परिवार’ पर देशभर के विद्वानों ने किया मंथन, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय पर दिया जोर।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 11 जनवरी। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का कल समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखक प्रो. डॉ. श्रीराम परिहार (खंडवा, मध्यप्रदेश) रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजन यादव ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. शिवप्रसाद शुक्ला, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कौस्तुभ रंजन सहा. प्राध्यापक अंग्रेजी विभाग उपस्थित रहे। सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वानों ने सहभागिता की।
प्रमुख वक्ताओं में प्रो. डॉ. वरप्रसाद कोल्ला (रायपुर), डॉ. उमाशंकर पांडे (दिल्ली), प्रो. डॉ. सावित्री त्रिपाठी (बेल्हा), प्रो. डॉ. आर. सुब्रमणि (बिलासपुर), प्रो. डॉ. रमेश सिंह (प्रयागराज), प्रो. डॉ. आर. ए. चौधरी, प्रो. डॉ. यू. के. मिश्रा (बिलाईगढ़) एवं प्रो. डॉ. के. अजीता (कोच्चि) शामिल रहे। वक्ताओं ने “भारतीय भाषा परिवार का राष्ट्रीय एकता में अवदान” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
इसके साथ ही विश्वविद्यालय एवं अन्य संस्थानों से पंजीकृत प्रतिभागियों द्वारा शोध पत्रों का वाचन किया गया। इस दौरान 6 से अधिक प्रदेशों से पहुंचे वक्ताओं ने प्रतिभागिता की और संस्कृत, तमिल, मलयालम, छत्तीसगढ़ी, हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, बांग्ला व अवधी सहित अन्य भाषाओं पर चर्चा की। सम्मेलन में विशेष रूप से आधुनिकता से सामंजस्य स्थापित करते हुए वर्तमान समय में भाषा का संवर्धन किस प्रकार हो इस पर जोर दिया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि भाषा के अंतर्गत शब्दों का आदान-प्रदान आवश्यक है। इससे भाषा समृद्ध होती है। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार एवं भारत भाषा समिति, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित यह कार्यक्रम देश की संस्कृति एवं परंपराओं को एक सूत्र में बांधने का काम करता है।
यह हर्ष का विषय रहा कि 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस भी मनाया गया और सम्मलेन में इसकी भी चर्चा की गई। यह सम्मेलन भारत के विभिन्न प्रांतों में बोली जाने वाली भाषाओं के आपसी समन्वय और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा, जिससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भी शैक्षणिक लाभ प्राप्त हुआ। समापन सत्र में संयोजक डॉ. कौस्तुभ रंजन द्वारा दो दिवसीय सम्मलेन की विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई एवं संचालन छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. देवमाइत मिंज ने किया।

