
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 जनवरी।महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसने देश के करोड़ों गरीब, मज़दूर एवं वंचित परिवारों को रोज़गार का कानूनी अधिकार प्रदान किया है। किंतु केंद्र की मोदी सरकार द्वारा हाल के दिनों में वी-बी-जी राम कानून के माध्यम से इस अधिकार को समाप्त कर मनरेगा को मात्र सरकारी कृपा पर आधारित योजना में बदलने का प्रयास किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से जनविरोधी एवं असंवैधानिक है।जनविरोधी निर्णय को कांग्रेस पूरे देश में 45 दिनों का “मनरेगा बचाओ अभियान” चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जिला प्रवक्ता डा अमित द्विवेदी ने प्रेस वार्ता के औचित्य पर प्रकाश डाला।अध्यक्षता करते हुए अशोक राम ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि गरीबों के सम्मान, स्वाभिमान और आजीविका का संवैधानिक अधिकार है। इस अधिकार को कमजोर करना सीधे-सीधे ग्रामीण भारत पर हमला है, जिसे कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।
इन्होंने कार्यक्रमों की रुपरेखा साझा की जिसमें 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास, 12 से 29 जनवरी तक पंचायत प्रतिनिधियों एवं मनरेगा मज़दूरों से संवाद,
30 जनवरी (शहीद दिवस) को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना, 31 जनवरी से 6 फरवरी तक ज़िला स्तर पर मनरेगा बचाओ प्रदर्शन, 7 से 15 फरवरी तक राज्य स्तर पर विधानसभा घेराव, तथा 16 से 25 फरवरी तक एआईसीसी द्वारा आयोजित ज़ोनल मेगा रैलियाँ संपन्न की जाएँगी।श्री राम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और जनआंदोलन के रूप में अंतिम मुकाम तक लड़ा जाएगा। इस आंदोलन की गूंज गाँव की गलियों से लेकर सड़क, सदन और संसद तक सुनाई देगी, जब तक मज़दूरों का अधिकार सुरक्षित नहीं हो जाता।
प्रमुख लोगों में सत्यप्रकाश राय,डॉ अमित कुमार द्विवेदी, घनश्याम उपाध्याय, जितेन्द्र शर्मा, रतन धमालिया, सूरज प्रकाश, ब्रजेश सिंह यादव, श्रीकांत राय, डॉ शिव प्रकाश राय, लाल बाबू गुप्ता, अरुण कुमार अरुण अजय पासवान सहित अन्य उपस्थित रहे।
