लगातार बढ़ रहे व्यवसाय से जीविका दीदियों के चेहरे पर खिल रही मुस्कान।

14 दिनों में हुई 19 करोड़ से ऊपर की बिक्री।
RKTV NEWS/पटना(बिहार )26 दिसंबर।अपनी संस्कृति, विरासत, शिल्प, स्वाद और परंपरा से जुड़ने और फिर उसे रूबरू होते हुए अपने दिनों को याद करते हुए हर्षित होने का अवसर बिहार सरस मेला प्रदान कर रहा हैं।जहां आगंतुक अपने सदियों पुरानी संस्कृति ,परम्परा और स्वाद से पुनः वाकिफ हो रहे हैं। आधुनिकता के इस दौर में बिहार सरस मेला के आयोजन ने राज्य की विरासत और संस्कृति की जड़ों को फिर से सींचने का काम किया हैं ।
बिहार सरस मेला ग्रामीण शिल्प, संस्कृति , स्वाद और उद्यमिता को प्रोत्साहन एवं सम्मान देने के उद्देश्य से पिछले 12 दिसंबर 25 से जीविका द्वारा गांधी मैदान, पटना में आयोजित है। यहां आगंतुक अपनी लोक संस्कृति , लोक गीत, लोक नृत्य एवं देशी स्वाद का दीदार करते हुए लुत्फ भी उठा रहे हैं। बड़ी संख्य में आगंतुकों का मेला में परिभ्रमण, सुव्यवस्थित स्टॉल पर उत्पादों का अवलोकन और फिर उसकी बड़े स्तर पर खरीददारी यह दर्शाता है कि आगंतुक अपने पुरानी संस्कृति , स्वाद, शिल्प और कलाकृतियों को संजो कर रखना चाहते हैं।
14 दिनों में खरीद – बिक्री का आंकड़ा 19 करोड़ रूपये से अधिक का है। अनुमानत: 12 लाख से अधिक लोग मेला में आए हैं। 25 दिसंबर को डेढ़ लाख से अधिक लोग आये और उस दिन 2 करोड़ रुपये से अधिक का कारोवार हुआ l यह आंकड़ा भी परिलक्षित कर रहा है कि सरस मेला और उसमें बिक्र रहे उत्पादों एवं व्यंजनों का आधुनिक समाज में भी बड़ा क्रेज है।
कई पीढियां एक साथ मेला में आ रही हैं और मेला के सेल्फी जोन पर फोटो लेकर अपनी पीढ़ी दर पीढ़ी की यादें भी संजो रहे हैं। फन जोन में बच्चे -बच्चियां खूब मस्ती कर रहे हैं। पालना घर में छोटे छोटे बच्चे बच्चियां के लिए खेलने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यहां दंपत्ति अपने बच्चों को खेलने के लिए छोड़कर मेला का आनंद उठा रहे हैं।
बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों के लिए जीविका के सामाजिक विकास विद्या के द्वारा व्हील चेयर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आगंतुक बिहार सरस रसोई परिसर में दीदी की रसोई समेत 50 स्टॉल पर विभिन्न प्रदेशों के देशी व्यंजनों एवं मिठाइयों का स्वाद ले रहे हैं। जीविका दीदियों द्वारा संचालित शिल्प ग्राम से स्टॉल, साड़ी समेत कई प्रकार के खादी एवं सिल्क आदि से बने परिधानों की बिक्री जारी है। इसी क्रम में जानकी सिलाई केंद्र के स्टॉल से भी सूट, दुपट्टा, स्टॉल, नाइटी आदि की भी बिक्री हो रही है।
इसी तरह पसंद सौ से अधिक स्टॉल से हस्तशिल्प, कलाकृतियों, परिधान, गर्म कपड़े, रजाई, दोहरा, कंबल, चादर, कालीन, रग्स, टेराकोटा, सेरामिक, फर्नीचर, कृत्रिम फूल एवं गहने, सुगंधित इत्र, अगरबत्तियां, कश्मीरी फल, मडूआ, बाजरा, जौ आदि के आटा, आचार, पापड़, अडवरी, दनवरी, आयुर्वेदिक पापड़, मालभोग और कतरनी चूड़ा, गुड़, लड्डू आदि की बड़े पैमाने पर बिक्री जारी है। मिट्टी से बने बर्तनों और वाटर बोतल की बड़ी मांग है।
बड़े पैमाने पर हो रही खरीद बिक्री को देखते हुए सरस मेला परिसर में जीविका दीदियों द्वारा ग्राहक सेवा केंद्र के साथ विभिन्न बैंकों के एटीएम वाहन की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सीसीटीवी कैमरा, पानीं के टैंकर, फायर ब्रिगेड के वाहन, एंबुलेंस, आपातकालीन प्रवेश एवं निकास गेट की भी व्यवस्था की गई हैं ।
शुक्रवार को सेमिनार कक्ष में अपेडा द्वारा सरस मेला में आई महिला उद्यमियों को उनके व्यवसाय को विस्तृत रूप देने के उद्देश्य से एक दिवसीय क्षमतावर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया l अपेडा के श्री सौरभ कुमार ने उन्हें व्यवसाय में सफलता का गुर सीखाया l इस कार्यक्रम का संयोजन सोनल पटेल ने किया l
संध्या समय में मुख्य सांस्कृतिक मंच पर सुमधुर गीत एवं बिहार के लोक नृत्यों की प्रस्तुति की गयी। नाज़िश बानो एवं राहुल सहनी की “आजा शाम होने आई” की युगल प्रस्तुति ने दर्शकों से तालियाँ बटोरी l तत्पश्चात अरुण और उनकी टीम ने “अरे रामा रिमझिम बरसे बदरिया”, हाली बरस इन्द्र देवता ,पानी बिन पडल आकाल हो राम” समेत कई लोकगीतों पर नृत्यों की प्रस्तुति कर दर्शकों की वाहवाही लुटी l मंच संचालन आशा कुमारी , परियोजना प्रबंधक , जीविका ने किया। स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित वातावरण में आयोजित बिहार सरस मेला का आयोजन कुशल प्रबंधन का नायाब उदाहरण हैं।

