
आरा/भोजपुर(डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)24 दिसंबर। स्थानीय लक्ष्मी नगर चंदवा में आयोजित श्रीरुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के चौथे दिन प्रवचन करते हुए प्रख्यात भागवत-वक्ता आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि कलियुग भेड़िया की तरह है जिसका अगला हिस्सा शेर की तरह और पिछला हिस्सा गीदड़ की तरह है। इसके आगे दबने वाले पर यह शेर की तरह सवार हो जाता है जबकि इसके आगे अड़नेवाले के सामने यह दुम दबाकर भाग जाता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा कलियुग के दोषों का शमन तथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का पोषण करती है।कथा से भक्ति उत्पन्न होती है और भक्ति से भगवान प्रकट हो जाते हैं। इस प्रकार कथा अमूल्य निधि है जो जीवमात्र को कृतार्थ कर देती है। आचार्य ने कहा कि जब-जब असुर अराजक तत्त्वों का बोलबाला बढ़ जाता है और सात्विक शक्तियों के ऊपर भयानक संकट उत्पन्न हो जाता है तब-तब भगवान श्रीराम-कृष्ण आदि अवतार धारण कर धर्म और प्रजा की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान की प्रसन्नता के लिए शास्त्रोक्त स्वधर्म का पालन करना और सभी के हित की भावना से भावित मन का होना आवश्यक है। आचार्य ने कहा कि घोर कलिकाल में भी अंतिम चरण तक कुछ ब्राह्मण परिवार वर्ण एवं कर्मसंकरता के दोष से सर्वथा विनिर्मुक्त व पवित्र होंगे जिनके घर भगवान कल्कि के रूप में अवतार लेंगे।
