
RKTV NEWS/दुमका ( झारखंड)16 दिसंबर।समाहरणालय सभागार में उपायुक्त सह न्यास परिषद के अध्यक्ष अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जामा विधायक डॉ. लुईस मरांडी, शिकारीपाड़ा विधायक आलोक कुमार सोरेन सहित विधायक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के सभी प्रखंडों के मुखिया बैठक से जुड़े।
बैठक में जानकारी दी गई कि खनन क्षेत्र से 15 किमी के दायरे में आने वाले क्षेत्र को डायरेक्टली अफेक्टेड एरिया तथा 25 किमी के दायरे को इनडायरेक्टली अफेक्टेड एरिया की श्रेणी में रखा गया है। इनडायरेक्टली अफेक्टेड एरिया की श्रेणी में पूरा जिला शामिल है। यह भी बताया गया कि डीएमएफटी फंड का 70 प्रतिशत भाग डायरेक्टली अफेक्टेड एरिया में खर्च करना अनिवार्य है।
बैठक में सरकार द्वारा प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के अंतर्गत जारी सेक्टरवार दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। निर्देशों के अनुसार फंड का अधिकतम 70 प्रतिशत भाग High Priority Sector तथा न्यूनतम 30 प्रतिशत भाग Low Priority Sector में व्यय किया जाना अनिवार्य होगा।
High Priority Sector के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, वृद्ध एवं दिव्यांग कल्याण, स्वच्छता, आवास, कृषि एवं पशुपालन, कौशल विकास एवं जीविकोपार्जन से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। वहीं Low Priority Sector में आधारभूत संरचना, सिंचाई, ऊर्जा, जलछानन सहित अन्य संबंधित कार्यों को शामिल किया गया है। जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनहित से जुड़े मूलभूत एवं सामाजिक विकास कार्यों को प्राथमिकता देना, जीवन स्तर में सुधार लाना तथा संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े मुखियाओं को उपायुक्त ने निर्देश दिया कि डायरेक्टली अफेक्टेड एरिया में किसी भी विकास कार्य के लिए ग्राम सभा के माध्यम से प्रस्ताव भेजें, ताकि नियमानुसार स्वीकृति प्रदान की जा सके।
बैठक में जामा विधायक डॉ. लुईस मरांडी ने कहा कि डीएमएफटी की राशि का उपयोग जिले के विकास कार्यों में किया जाए, जिससे आमजनों को सीधा लाभ मिले। उन्होंने पेयजल से संबंधित समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।
शिकारीपाड़ा विधायक आलोक कुमार सोरेन ने कहा कि जिला आदिवासी बहुल है, इसलिए सभी को मिलकर समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। खनन प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुरूप योजनाओं का चयन कर विकास कार्य किए जाने चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आए।
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि डीएमएफटी गाइडलाइन में परिवर्तन के अनुसार 70 प्रतिशत राशि High Priority Sector तथा न्यूनतम 30 प्रतिशत राशि Low Priority Sector में व्यय किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पेयजल, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। डीएमएफटी की राशि से विद्यालयों में बाउंड्री निर्माण कराया जा रहा है तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु आवश्यकता अनुसार एम्बुलेंस क्रय की जा सकती है। इसके अतिरिक्त नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा सकती है।
उपायुक्त ने यह भी बताया कि डीएमएफटी फंड का प्रतिवर्ष ऑडिट कराया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि डीएमएफटी से ऐसी योजनाओं का चयन किया जाए, जिनसे अधिकाधिक आमजनों को लाभ मिले तथा योजनाओं का चयन ग्राम सभा के माध्यम से सुनिश्चित किया।
बैठक में उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान सहित जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
