यूपी, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक तथा बिहार के 25 परिवार कैम्प में लेंगे हिस्सा।
फैमिली कैंप आने वाले समय में बिहार की पर्यटन क्षमता, इको-टूरिज्म के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, शाहाबाद ईकाई द्वारा आयोजित होगा कैम्प।
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)10 दिसंबर।यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, बिहार राज्य शाखा द्वारा मंगलवार को संभावना आवासीय उच्च विद्यालय के जुबली हॉल में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान आगामी 13 से 15 दिसंबर 2025 तक बिहार के पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में आयोजित होने वाले नेशनल फैमिली कैंप की रूपरेखा साझा की गई। अब तक कई राष्ट्रीय आयोजनों को करने वाली शाहाबाद इकाई इस बार भी राष्ट्रीय स्तर पर फैमिली कैंप का आयोजन करने जा रही है। यह क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य उपाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह एवं शाहाबाद यूनिट के चेयरमैन रमाकांत सिन्हा ने संयुक्त रूप से बताया कि यूथ हॉस्टल एसोसिएशन विगत 76 वर्षों से देश को प्रकृति के करीब लाने, युवाओं एवं परिवारों को साहसिक प्रशिक्षण, पर्यावरणीय जागरुकता तथा ट्रेकिंग गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। आगामी कैंप में बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तर प्रदेश एवं कर्नाटक से कुल 25 परिवार भाग लेंगे। यह शिविर जंगल सफारी, प्राकृतिक अध्ययन जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण, रात्रि कैम्पिंग और साहसिक गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा। शाहाबाद इकाई की सचिव सोनू कुमारी ने बताया कि आयोजन की सफलता हेतु प्रोग्राम डायरेक्टर रमाकांत सिन्हा, फिल्ड डायरेक्टर गोपी अम्मा के.एम., प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर कमलेश कुमार सिंह, प्रोग्राम कन्वेनर मुन्ना कुमार, कैंप लीडर अखौरी रविंद्र कुमार एवं नीली रानी को जिम्मेदारी दी गई है। यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया बिहार राज्य शाखा की उपाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने कहा कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व को बिहार का कश्मीर कहा जाता है। यह अवसर राज्य की प्राकृतिक संपदा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे नेशनल फैमिली कैंप आने वाले समय में बिहार की पर्यटन क्षमता, विशेषकर इको-टूरिज्म के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। शाहाबाद यूनिट के चेयरमैन रमाकांत सिन्हा ने कहा कि यह आयोजन न सिर्फ रोमांच और अनुभव का आदान-प्रदान है, बल्कि यह बिहार को राष्ट्रीय साहसिक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

