
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)02 दिसम्बर।195–अगिआँव (अ.जा.) विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार शिवप्रकाश रंजन ने आज बिहार के उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए 2025 बिहार विधानसभा चुनावों में हुए गंभीर अनियमितताओं एवं अवैधताओं पर तत्काल संज्ञान लेने की माँग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि इन गड़बड़ियों ने चुनाव परिणाम को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया, जिसके कारण उन्हें मात्र 95 मतों के अत्यंत कम अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।
शिवप्रकाश रंजन ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि चुनाव प्रक्रिया की घोषणा से पहले और बाद में कई ऐसे घटनाक्रम और भ्रष्ट आचरण सामने आए जिन्होंने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की संभावना को गंभीर रूप से क्षति पहुँचाई। निर्वाचन नामावली के विशेष सघन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक एवं पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हट गए। गरीबी, भय, अशिक्षा और सामाजिक कारणों से वे निर्धारित प्रक्रिया में अपनी आपत्ति भी दर्ज नहीं करा सके।
ज्ञापन में आगे कहा गया कि सत्तारूढ़ गठबंधन, जिसमें भाजपा भी शामिल है, द्वारा चुनाव से ऐन पहले प्रत्यक्ष नकद अंतरण संबंधी योजनाओं की घोषणा तथा मतदान से ठीक पूर्व मतदाताओं के खातों में राशि भेजना आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। कई रिपोर्टों ने यह भी पुष्टि की है कि इस कदम का मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव पड़ा।
शिवप्रकाश रंजन ने यह भी आरोप लगाया कि 175 डाक मतपत्रों को बिना किसी वैध कारण के और कानून के प्रावधानों के विरुद्ध अमान्य कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मतगणना की प्रक्रिया भी विधि-विरुद्ध ढंग से संचालित की गई तथा रिटर्निंग अधिकारी द्वारा पुनर्गणना से इनकार करना चुनाव नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने यह भी बताया कि मतगणना केंद्र की CCTV/वेबकास्टिंग फुटेज सहित कई आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध कराने का अनुरोध पहले ही किया जा चुका है, परंतु अब तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।
रंजन ने कहा कि ये सभी कारक चुनाव परिणाम को भौतिक रूप से प्रभावित करते हैं और 195–अगिआँव (अ.जा.) विधानसभा क्षेत्र का चुनाव अवैधताओं एवं अनियमितताओं से गंभीर रूप से ग्रसित है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे परिस्थितियों में इस चुनाव की वैधता संदिग्ध हो जाती है और यह शून्य घोषित किए जाने योग्य है।
शिवप्रकाश रंजन ने अंत में कहा कि उन्हें अत्यंत व्यथा के साथ यह सार्वजनिक रूप से कहना पड़ रहा है कि चुनाव और मतगणना की पूरी प्रक्रिया कानून और संविधान की भावना के विपरीत संचालित हुई है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मामले की उच्चस्तरीय जाँच और आवश्यक कार्रवाई की माँग की।
