
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)27 नवंबर। बुधवार को श्री सीताराम विवाह महोत्सव महावीर स्थान रामना मैदान आरा, राष्ट्रीय महिला परिषद माचा स्वामी महिला सेवा समिति द्वारा इस आयोजन क़े 15वा वर्ष के चतुर्थ दिवस क़े पावन अवसर पर पूर्व अवस्थित देवी देवताओ कि विधिवत वैदिक रीति रिवाज से पंडित ज्योति पाठक, मनीष मिश्रा ने पूजन कराई। उसके बाद श्री रामचरित्र मानस पाठकर्ता शशि भूषण महाराज पाठ क़े मध्यम मे कहा जब निषाद राज ने प्रभु श्रीराम घास पते पर सोया देखा तो उनके अंदर विशाद उत्पन्न हुआ ।वह लक्षुमण जी से कहा हारे विधाता यदि श्रीराम खर पतवार पे सोते है तो पलंग सुख वैभव कि सम्मान क्यों बनाई, हाय रे कैकई तेरे जीभ मे कीड़े पड़े जो सुख क़े समय मे प्रभु को दुख दिया, तब लक्षुमण जी ने कहा भईया कोई किसी को दुख या सुख नहीं देता अपनी कर्म का फल सबको भोगना पड़ता है।
वही दोपहर 02.30 बजे श्रीधाम वृन्दावन से पधारे श्रीमद भागवत कथा व्यास प्रेममूर्ति प्रदीप जी महाराज ने कथा मे कहा प्रभु कि अवतार का कारण एक नहीं अनेक होते है यदि दैतो को मरना होता तो दैतो को उत्तपन नहीं करते, प्रभु अपने भक्तो को सुख अनुभव कराने उनकी दुख को हरने,उन्हें अपनी दर्शन उन्हें प्रदान करने,जो तपता वही तपस्वी होता वही साधक ईस्वर को प्राप्त करता, सननत कुमारो एवं सूत जी कि प्रतिभासित करते हुवे कथा को आगे भागवत कि उत्पति भागवत क्या है ।उन्होंने कहा भागवत साक्षात् प्रभु कि रहने का विग्रह है, यानि साक्षात् प्रभु ही है। राजा परीक्षित को श्राप लगी आज क़े सातवे दिन तक्षक नाग से प्राण निकलेगा, उन्होंने मृत्यु को सविकारी और सुकदेव जी से श्रीमद भागवत कथा श्रवण किया ।अपने जीवन कि मृत्यु को मुक्त बनाया और अंत समय जो कष्ट होती है उससे मुक्त हुवे।
भागवत जी कि पूजन आरती लालती सिंह, उषा पाण्डेय, विमला सिंह, उर्मिला सिंह, गुड़िया देबी, पुष्पा सिन्हा, प्रतिमा देवी, रेखा सिन्हा, सीमा पाण्डेय, जयप्रकास तिवारी, रविशंकर तिवारी, नवल प्रसाद, सुमन बाबा, चन्दन ओझा, महेन्दर यादव आदि उस्थित रहे।
