“असफलता एक घटना है, कोई व्यक्ति नहीं”: खेर
RKTV NEWS/नई दिल्ली 25 नवंबर।मंत्रमुग्ध कर देने वाले एक अभिव्यक्ति में, प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने गोवा के पणजी स्थित कला मंदिर में सोमवार को मास्टरक्लास में सैकड़ों लोगों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया और ‘हार मानना कोई विकल्प नहीं है’ विषय पर आयोजित सत्र में अपनी विशिष्ट बुद्धि और बुद्धिमत्ता से उनका मन मोह लिया।
अनुपम खेर ने इस सत्र की शुरुआत फिल्म “सारांश” की शूटिंग से कुछ दिन पहले अपनी मुख्य भूमिका खोने और फिर उसे दोबारा पाने की कहानी से की। छह महीने तक इस भूमिका में जी-जान से जुटे रहने के बाद, अचानक मिली अस्वीकृति ने उन्हें तोड़कर रख दिया। निराशा में, जब उन्होंने मुंबई शहर को हमेशा के लिए अलविदा कहने का निश्चय कर लिया, तो वे फिल्म के निर्देशक महेश भट्ट से आखिरी बार मिलने गए। अनुपम खेर की तीखी प्रतिक्रिया देखकर, भट्ट ने पुनर्विचार किया और उन्हें फिर से फिल्म में शामिल कर लिया और यह फिल्म अनुपम खेर के करियर का एक निर्णायक मोड़ बन गई। इस अनुभव पर विचार करते हुए, खेर ने बताया कि कैसे फिल्म “सारांश” ने उन्हें हार न मानने का सबक सिखाया। उन्होंने कहा कि यही झटका उनके उत्थान की शुरुआत था।
“मेरे सभी प्रेरक भाषण मेरे जीवन के अनुभवों पर आधारित हैं”
अनुपम खेर पूरे सत्र में अपने जीवन के उदाहरण देते रहे। उन्होंने बताया कि कैसे 14 सदस्यों वाले एक तंग, निम्न-मध्यम वर्गीय घर में रहने के बावजूद, उनके दादाजी बेफ़िक्र थे और जीवन के प्रति उनका नज़रिया अनोखा था। उन्होंने परिस्थितियों के बावजूद अपने खुशहाल बचपन को याद किया और छोटी-छोटी चीज़ों में खुशी ढूंढ़ने की अपने दादाजी की सीख साझा की।
“असफलता एक घटना है, कोई व्यक्ति नहीं।”
अनुपम खेर ने अपनी युवावस्था की एक मार्मिक याद साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उनके पिता, जो वन विभाग में क्लर्क थे, ने उनके सोचने के तरीके को आकार दिया। खेर ने उस घटना को याद किया जब उनके पिता को रिपोर्ट कार्ड से पता चला कि खेर 60 छात्रों की कक्षा में 58वें स्थान पर थे। परिणाम से परेशान होने के बजाय, उनके पिता ने एक लंबा विराम लिया और कहा, “जो व्यक्ति अपनी कक्षा में या खेलों में प्रथम आता है, उस पर हमेशा अपने ट्रैक रिकॉर्ड को बनाए रखने का दबाव रहता है, क्योंकि सर्वोच्च ग्रेड से कम कुछ भी असफलता जैसा लगता है। लेकिन जो व्यक्ति 58वें स्थान पर आया है, उसके पास अपनी स्थिति सुधारने के पूरे अवसर हैं। तो, मुझ पर एक एहसान करो, अगली बार 48वें स्थान पर आना।”
“अपनी खुद की बायोपिक में मुख्य भूमिका निभाएं”
अनुपम खेर ने पूरे सत्र के दौरान अपने जीवन की अनेक घटनाओं और उदाहरणों के जरिए उपस्थित लोगों को अपना दृष्टिकोण सुधारने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से समझाया कि व्यक्तित्व का अर्थ केवल यह है कि आप जो हैं, उसमें सहज हैं। उन्होंने श्रोताओं से बार-बार आग्रह किया कि वे स्वयं पर विश्वास करें और अपनी बायोपिक में लीड रोल करें। उन्होंने प्रश्न किया, “जीवन आसान या सरल क्यों होना चाहिए? जीवन में समस्याएं क्यों नहीं होनी चाहिए? क्योंकि आपकी समस्याएं ही आपकी बायोपिक को सुपरस्टार बायोपिक बनाएंगी।”
इस हंसमुख और वन-मैन शो ने पूरे प्रश्नोत्तर सत्र में सबका ध्यान खींचा। अपने समापन भाषण में उन्होंने कहा, “‘हार मानना कोई विकल्प नहीं है’ सिर्फ़ एक मुहावरा नहीं है। यह अविश्वसनीय तौर पर कड़ी मेहनत है। मेरा मानना है कि अगर आप कुछ चाहते हैं, तो आपको त्याग करना होगा और खुद को दृढ़ रहने के लिए राजी करना होगा। आपको निराशाएं झेलनी पड़ेंगी। लेकिन अगर आप हार मान लेते हैं, तो कहानी वहीं खत्म हो जाती हैं, मेरे दोस्त।”

