
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)18 नवम्बर। वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर अखिल भारतीय कला मंदिर संस्था द्वारा कल दिनांक 15 नवंबर 2025 को विश्व संवाद केंद्र शिवाजी नगर में एक देशभक्ति काव्य गोष्ठी का आयोजन किया, जिसकी अध्यक्षता डॉक्टर गौरी शंकर शर्मा ‘गौरीश’ राष्ट्रीय अध्यक्ष कला मंदिर ने की। मुख्य अतिथि मनोज श्रीवास्तव आईएएस राज्य निर्वाचन आयुक्त, विशिष्ट अतिथि डॉक्टर साधना बलवटे निर्देशक निराला सृजन पीठ एवं मदन मोहन ‘समर’ राष्ट्रीय ओज कवि साथ कला मंदिर संस्था के कार्यकरी अध्यक्ष हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’, उपाध्यक्ष रामबाबू शर्मा एवं डॉ. वंदना मिश्रा, सचिव व्ही.के. श्रीवास्तव की उपस्थिति में भोपाल तथा आसपास के क्षेत्र के कवियों एवं कला मंदिर के सदस्यों द्वारा राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं का पाठ किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ गौरी शंकर शर्मा ‘गोरीश’ द्वारा वंदे मातरम गीत के संबंध में अपने संक्षिप्त उद्बोधन के साथ आमंत्रित सभी अतिथियों का स्वागत किया। प्रमुख अतिथि मनोज श्रीवास्तव राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा मध्य प्रदेश शासन द्वारा वंदे मातरम गीत के सृजन के डेढ़ सौ वर्ष संपन्न होने पर उनकी कृति वंदे मातरम को पुनर्प्रकाशित कराया है। इस राष्ट्र गान में भारत मां की वंदना वसुंधरा के रूप में की गई है, विश्व के किसी भी देश के राष्ट्रगान में इस तरह की वंदना नहीं की गई है। विभिन्न देशों के राष्ट्रीय गानों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस गीत की प्रत्येक पंक्ति का विशद विवरण समझाया। डॉ साधना बलवटे द्वारा अपने विचार प्रकट करते हुए इस आयोजन को कलामन्दिर संस्था द्वारा आयोजित करने पर संस्था का धन्यवाद ज्ञापित किया। ओज के राष्ट्रीय हस्ताक्षर चौधरी मदन मोहन ‘समर’ ने जिन व्यक्ति या संस्थाओं ने इस राष्ट्र गान गाने के इनकार किया है, उनपर प्रश्न किया। देश के संविधान और गान और राष्ट्र प्रतीकों का सम्मान तो करना होगा। उन्होंने अपनी तमाम ओज पूर्ण रचनाओं की कुछ पंक्तियों की वानगी रखी” देश की धरा जरा से मुक्त धरा है ये।” अंडमान की सेल्युलर जेल प्रथम तीर्थ, और ‘’ये तुम्हारे छप रहे विज्ञापन हज़ूर।” हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’ ने राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान गाते हुए कुर्बान हुए शहीदों का स्मरण करते ‘ देश गुलाम रहा बरसों बर्तान हुकूमत थी भयकारी ‘ रचना सुनायी।रामबाबू शर्मा ने संक्षिप्त उद्बोधन के साथ ‘ राष्ट्रभावना है वन्दे मातरम’ सुनाया। डॉ वन्दना मिश्र ने भी राष्ट्र गान और अपनी परंपराओं से दूर होती नई पीढ़ी पर चिंता व्यक्त की। व्ही के श्रीवास्तव ने ‘ एक कवि ने देश जगाया, जब वन्दे मातरम गीत बनाया”, सुनाया।
काव्य ग़ोष्ठी का प्रारम्भ वीणा विद्या द्वारा माँ सरस्वती वनदना के सस्वर पाठ के साथ ‘ मिटने का फन रखते हैं, दिल में वतन रखते हैं’ गीत सुनाया। संतोषकुमार सोनी ने उनके बलिदानों से हम यह जीवन पर्व मनाते हैं।” सविता बांगड़ द्वारा ‘ वंदे मातरम गीत नहीं भारत की कहानी है।” साधना शुक्ला जी ने “ भारत की आन बान शान स्वदेशी’. रश्मि मिश्रा ने शांति- शांति से मिल जाती तो कुरुक्षेत्र यूँ लाल न होता।’ नीता सक्सेना ने ग़ज़ल ‘ धरा की वेदना सुनकर बहुत गमगीन है अम्बर’, सरोज लता सोनी ने ‘शान भारत की रही है शान भारत की’, कविता शिरोली ने ‘जिओ सभी को जीने दो का देता सभी को ज्ञान,”। पुरुषोत्तम तिवारी ने ‘ दूर होगा सघनतम” गीत सुनाया, प्रियंका श्रीवास्तव ने ‘यह भारत, मैं इसकी पुजारी, करें देश सेवा हो इच्छा हमारी।’ अशोक धमेनिया ने ‘दीप मालिका के दीपक भले सजा दो’’ गीत सुनाया, सीमा शिवहरे ने ‘गद्दार छुपे हुए दहशत में आ गए,’ गजल प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शानदार संचालन कर रहीं जया शर्मा ‘केतकी’ ने भी अपना सुंदर गीत सुनाकर तालियां बटोरीं। इसी तरह तमाम कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, अंत में आभार हरिवल्लभ शर्मा ‘ ‘हरि’ ने व्यक्त कर कार्यक्रम समाप्त किया।
